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गुरुवार, 19 जून, 2008 को 14:59 GMT तक के समाचार
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उन्हें मत मारो, उन्हें छोड़ दोः सोनिया

सोनिया गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इन दिनों दो दिन की महाराष्ट्र की यात्रा पर है
मुंबई में कांग्रेस पार्टी के प्रांतीय सम्मेलन के ज़रिए पार्टी राज्य में विधानसभा चुनावों की तैयारी का बिगुल फूंकने वाली थी लेकिन इस दौरान मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी हुई...और फिर नारे लगाने वालों की पिटाई भी हुई.

सम्मेलन में पूरे राज्य से पार्टी के कार्यकर्ता मुंबई पहुँचे थे और उन्हें पार्टी नेता सोनिया गांधी संबोधित करने वाली थीं.

सोनिया गांधी के आने से पहले तक सब कुछ शांत था और उनके आने के बाद लोगों ने मंच की तरफ बढ़ना शुरु कर दिया.

नारेबाज़ी

भाषण देने की बारी शुरु हुई और मंच पर जैसे ही सुशील कुमार शिंदे पहुंचे नीचे से नारेबाज़ी शुरु हो गई. नारे लगाने वालों की संख्या इतनी अधिक थी कि सारे पत्रकारों की नज़र और कैमरामैनों का कैमरा मंच की ओर से हटकर पीछे चला आया.

ये नारे लग रहे थे सीएम हटाओ महाराष्ट्र बचाओ, विलासराव हटाओ महाराष्ट्र बचाओ.. हालत यहां तक हो गई कि प्रदेश की प्रभारी मार्गेट अल्वा को मंच पर आना पड़ा.

उन्होंने शांति रखने की अपील की और साथ ही कहा कि अगर ये बाहर के लोग हैं तो इन्हें हटाया जाए.

उनका कहना था, "यह सही नहीं है कि पत्रकारों और चैनलों के सामने कार्यकर्ता ऐसी हरकत करें. ये सोनिया जी को अच्छा नहीं लग रहा है. सोनिया जी आपसे अलग से बात करने को तैयार हैं आप शांत हो जाएँ. अगर आप शांत नहीं होंगे और उपद्रव मचाएंगे तो हमारे कार्यकर्ता आपको बाहर निकाल सकते हैं".

 यह सही नहीं है कि पत्रकारों और चैनलों के सामने कार्यकर्ता ऐसी हरकत करें. ये सोनिया जी को अच्छा नहीं लग रहा है
मारग्रेट अल्वा, कांग्रेस नेता

मारग्रेट अल्वा की इस चेतावनी के थोड़ी ही देर बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मार-पीट शुरू कर दी.

नारे लगाने वालों को लात-जूतों का सामना करना पड़ा. उन्हें घसीटते हुए पीछे ले जाया गया और ऐसी मारपीट हुई कि सारे लोग मंच की तरफ जान बचाने भागे...फिर शांति हुई.

कार्यक्रम के आयोजक संजय निरुपम का चेहरा लटक चुका था और प्रेस दीर्घा के पास आकर मानो कह रहे हों कोई बात नहीं सब ठीक है.

इसके बाद मुख्यमंत्री देशमुख पहुंचे और भाषण समाप्त किया जिस दौरान कोई चिल्लपों नहीं हुईं.. अलबत्ता तालियां ज़रुर बजीं.

ज़ाहिर था अपनी बात सुनाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ता निकाले जा चुके थे बस विलासराव समर्थक बचे थे.

सोनिया गांधी का भाषण अंत में था और उन्होंने सरकार की उपलब्धियाँ एक सिरे से गिनानी शुरु कीं.

हालांकि जाते-जाते सोनिया गांधी को विरोध का मर्म समझ में आ चुका था.. शायद इसलिए उन्होंने खुद माइक पर आकर इतना कहा.. उन्हें मत मारो. काले झंडे दिखा रहे थे कोई बात नहीं.. उन्हें छोड़ दो...

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