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'सहारा समूह को ज़मीन वापस करें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ प्रशासन को एक अंतरिम आदेश के तहत कहा है कि वह सहारा समूह के मुख्यालय सहारा सिटी की ज़मीन को 24 घंटे के अंदर सहरा समूह को वापस लौटा दे. बुधवार रात और गुरुवार तड़के लखनऊ विकास प्राधीकरण (एलडीए) ने कार्रवाई कर सहारा समूह के मुख्यालय में कई इमारतें गिरा दी थीं और उस ज़मीन को 'कब्ज़े से मुक्त कराया' था. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस ज़मीन के बारे में गुरुवार को लंबी सुनवाई के बाद ये आदेश सुनाया. सरकारी वकील का कहना था कि ने बताया कि वह वह इस आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाएँगे. अदालत ने यह जानना चाहा कि कार्रवाई रात में क्यों की गई. अदालत ने कहा कि अस्पताल और सिनेमा घर जैसी इमारतों को रात में गिराने का कोई औचित्य नहीं है. मौलिक अधिकारों का हनन दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने ये भी पूछा कि कार्रवाई बिना किसी लिखित नोटिस के क्यों की गई? अदालत ने इस कार्रवाई को मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज में इस तरह की कार्रवाई संभव नहीं है. अपने आदेश में अदालत ने कहा है कि अगर सहारा समूह चाहे तो ध्वस्त की गई इमारतों को फिर से बनवा सकता है. अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह यह सुनिश्चित करें कि प्रदेश का कोई भी विकास प्राधीकरण इस तरह की कार्रवाई रात में न करे. अगर आवश्यक हो तो इस तरह की कार्रवाई सुबह नौ बजे से शाम पाँच बजे के बीच की जाए. मास्टर प्लान सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि सहारा समूह से विचार-विमर्श के बाद 2005 में मास्टर प्लान में ज़ोनल रोड के लिए 30 मीटर की सड़क छोड़ी गई थी. उन्होंने बताया कि 13 जून को सहारा समूह और एलडीए के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में सहारा के अधिकारियों ने इन इमारतों को गिराने को कहा था. सहारा समूह ने 17 जून के बाद कुछ इमारतों को गिराया था, जिसके बाद उसमें एलडीए भी शामिल हो गया. अदालत ने एलडीए के उपाध्यक्ष राम बहादुर को भी तलब किया था, जिन्होंने स्वीकार किया कि इस कार्रवाई से पहले सहारा समूह को कोई नोटिस नहीं दिया गया. सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार सरकारी वकील पीएन गुप्त ने अदालत का आदेश आने के बाद कहा कि आदेश की प्रति मिलते ही सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी. एलडीए की ओर से बुधवार रात सहारा शहर में की गई कार्रवाई गुरुवार दिनभर शहर में चर्चा का विषय बनी रही. लोगों का मानना है कि सहारा समूह ने भले ही इस मामले में क़ानूनी जंग का पहला चरण जीत लिया हो, लेकिन यह भ्रम तो टूट ही गया है कि उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर सकती है. तड़के एक बजे कार्रवाई लखनऊ के समृद्ध इलाक़े गोमतीनगर में स्थित सहारा सिटी में बुधवार देर रात एक बजे शुरू हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई गुरुवार सुबह पाँच बजे तक चलती रही. शहर के लोग गुरुवार सुबह जब सोकर उठे तो देखा कि सड़क के किनारे 30 मीटर चौड़ाई में एक फर्लांग तक चहारदीवारी गिरा दी गई है और इस दायरे में आने वाली इमारतों को भी गिरा दिया गया है. माना जा रहा है कि तोड़फोड़ की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर की गई थी. सरकारी अधिकारियों का कहना था कि सहरा समूह ने मास्टर प्लान में छोड़ी गई 30 मीटर चौड़ी सड़क को अतिक्रमण कर उसे अपने कब्ज़े में लिया था. अधिकारियों के अनुसार सड़क को अवैध क़ब्ज़े से मुक्त कराने के लिए यह कार्रवाई की गई. लखनऊ नगर निगम और एलडीए ने सहारा समूह को वर्ष 1994 में इस इलाक़े में 270 एकड़ ज़मीन ग्रीन बेल्ट विकसित करने और मनोरँजन पार्क बनाने के लिए दी थी. वर्ष 1997 में तत्कालीन सरकार इस ज़मीन को वापस लोने वाली थी, जिसपर सहारा समूह ने स्थानीय न्यायालय से स्टे ले लिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें सुब्रत रॉय सहारा के साथ 'एक मुलाक़ात'09 सितंबर, 2007 | कारोबार इंडियन क्रिकेट लीग को मिला सहारा22 अगस्त, 2007 | खेल की दुनिया सहारा ने गोस्वामी को बर्खास्त किया09 जून, 2005 | भारत और पड़ोस टीवी पर दिखेंगे सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय08 जून, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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