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शाही महल बना संग्रहालय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के शाही महल नारायणहिती को छोड़ने के चार दिन बाद नेपाली सरकार ने इसे एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया है. नेपाली सरकार ने शाही महल में रविवार को अपना पहला सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया. इस कार्यक्रम में माओवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे. नेपाल के अधिकारियों ने शाही महल के ऊपर 'नारायणहिती संग्रहालय' का एक बोर्ड टाँग दिया है. नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजी प्रसाद कोइराला ने शाही महल के मैदान में राष्ट्रीय झंडे को फहराया और कहा कि झंडे की तरह ही महल भी अब आम लोगों का है. अधिकारियों का कहना है कि अभी संग्रहालय को तैयार होने में कई महीने लग जाएँगे. संग्रहालय का आकर्षण उन्होंने कहा कि संग्रहालय का एक आकर्षण नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के पिता राजा त्रिभुवन को वर्ष 1939 में तोहफ़े में मिली मर्सिडिज़ बेंज़ कार होगी जिसे हिटलर ने उन्हें भेट किया था. साथ ही संग्रहालय में राज सिंहासन और बहुमूल्य राज मुकुट भी लोगों के देखने के लिए रखे जाएँगे. उल्लेखनीय है कि पिछले हफ़्ते ज्ञानेंद्र ने नेपाल सरकार को राज सिंहासन और बहुमूल्य राज मुकुट सौंप दिया था. बहुत से जानकारों ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के महल छोड़ने की घटना को सम्मानजनक कहा है. ज्ञानेंद्र काठमांडू के बाहरी इलाक़े में अपने निजी आवास नागार्जुन में रहने चले गए है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नारायणहिती' छोड़कर 'नागार्जुन महल' गए ज्ञानेंद्र12 जून, 2008 | भारत और पड़ोस राजा लोकहित के लिए काम करेंगे11 जून, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाली राजशाही का इतिहास28 मई, 2008 | भारत और पड़ोस राजशाही ख़त्म, गणतंत्र बना नेपाल28 मई, 2008 | भारत और पड़ोस गणतांत्रिक नेपाल में जश्न का माहौल29 मई, 2008 | भारत और पड़ोस 'राजशाही ख़त्म नहीं, तो चुनाव में बाधा'18 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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