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बुधवार, 11 जून, 2008 को 15:50 GMT तक के समाचार
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सर्वशिक्षा अभियान के लिए ब्रितानी सहायता
स्कूली छात्र
भारत में बहुत से बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं
ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्रालय ने भारत सरकार के सर्व शिक्षा अभियान के दूसरे चरण के लिए 1200 करोड़ यानी बारह अरब रुपए की सहायता राशि देने की धोषणा की है.

ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्रालय के स्थाई सचिव नेमत शेफ़िक़ ने नई दिल्ली में भारत के लिए एक नई योजना की शुरुआत करते हुए इसकी यह राशि देने की भी घोषणा की.

नेमत शेफ़िक़ ने कहा, "दुनिया में भारत एक शक्ति के रूप में उभर रहा है लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यहाँ 40 करोड़ से ज़्यादा लोगबहुत ग़रीबी में ग़ुजर-बसर कर रहे हैं और अन्य पचास करोड़ लोग भी सिर्फ़ एक से दो डॉलर के बीच प्रतिदिन के ख़र्च पर गुज़ारा करते हैं."

उन्होंने कहा, "मैं समझता हूँ कि शिक्षा भारत के सुनहरे भविष्य की कुँजी है. इस सहायता राशि से भारत में सभी बच्चों को स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी."

छह से 14 वर्ष तक के सभी बच्चे प्राथमिक शिक्षा के लिए नामांकन करवाएँ और स्कूल जाएँ, यह सुनिश्चित करने के लिए इस सहायता राशि का इस्तेमाल किया जाएगा.

हाशिए पर बच्चे

प्राथमिक शिक्षा के स्तर को सुधारने के साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि समाज के हाशिए पर रह रहे समूहों की लड़कियों और बच्चों को शिक्षा का लाभ ज़्यादा से ज़्यादा मिले.

 मैं समझता हूँ कि शिक्षा भारत के सुनहरे भविष्य की कुँजी है. इस सहायता राशि से भारत में सभी बच्चों को स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी
ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विभाग के स्थायी सचिव

सर्व शिक्षा अभियान के पहले चरण में ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्रालय की सहायता राशि का इस्तेमाल लाखों बच्चों का स्कूलों में दाख़िला करवाने में हुआ था.

यह भी भी घोषणा कि गई कि ब्रिटेन का अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्रालय बिहार में विकास के लिए एक नया विकास कार्यक्रम शुरू करेगा.

अगले पाँच वर्षों में बिहार में शहरी सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के ऊपर 10 करोड़ पांउड यानी लगभग आठ अरब रुपए निवेश करने की ब्रिटेन की योजना है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने साल 2008 के आरंभ में घोषणा की थी कि भारत में अगले तीन वर्ष में साढ़े 82 करोड़ पाउंड ख़र्च किए जाएंगे. इसमें से पचास करोड़ पाउंड स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को सुधारने पर ख़र्च होंगे.

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