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आगे की बातचीत के लिए तैयार:गूजर नेता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गूजर आंदोलनकारियों और राजस्थान सरकार के बीच बातचीत बयाना में समाप्त हो गई है. गूजर नेताओं ने राजस्थान सरकार के साथ बातचीत को ठीक बताया. उन्होंने गूजर नेता बैंसला कि लिए ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा की माँग भी की है. संवाददताओ से बातचीत करते हुए गूजर नेताओं कहा कि वे अगले दौर की बातचीत के लिए तैयार हैं. नेताओं ने सरकार से माँग की है कि वह गूजरों के गाँव में बिजली और पानी को बहाल करे. उनका आरोप था कि सरकार से इसे रोक दिया है.साथ ही पुलिस कार्रवाई को नियंत्रित करने की माँग भी की गई. गूजर नेताओं ने मंगलवार को प्रस्तावित भारत बंद को भी वापस ले लिया है. गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैसला ने वार्ता में भाग नहीं लिया था. संवाददाताओं से बातचीत करते हुए किरोड़ी सिंह बैसला ने कहा था कि वे धरना स्थल को छोड़ कर नहीं जाएँगे. राजस्थान सरकार अपने दो प्रतिनिधियों खान मंत्री लक्ष्मी नारायण दवे और सांवरलाल जाट को गूजर आंदोलनकारियों से बातचीत करने के लिए बयाना भेजा था. ये दोनों प्रतिनिधि सोमवार को 37 गूजर प्रतिनिधियों से मिले. बातचीत बयाना में इसलिए हुई क्योंकि गूजर नेताओं ने बातचीत के लिए जयपुर आने का निमंत्रण ठुकरा दिया था. राज्य सरकार चाहती है कि अगले दौर की बातचीत जयपुर में हो. लेकिन गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा कि सरकार के साथ जयपुर में होनेवाली बातचीत बयाना की बातचीत की सफलता पर निर्भर करेगी. इससे पहले किरोड़ी सिंह बैंसला ने सरकार को बातचीत में शामिल होनेवाले 45 प्रतिनिधियों की सूची सौंपी थी. राज्य सरकार ने इस सूची को छोटा करने का अनुरोध किया था. सरकार का मानना था कि ये सूची काफ़ी लंबी है और इसमें 13 लोग राजस्थान के बाहर के हैं. दूसरी ओर किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना था कि इनमें से कई क़ानून के जानकार हैं. बातचीत की राजनीति इधर विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि राजस्थान की सरकार मामले को हल करने की जगह राजनीति कर रही है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता अशोक गहलौत का कहना है, " सरकार इस मामले को हल करने के प्रति गंभीर नहीं है, केंद्र सरकार उन्हें पूरा समर्थन दे रही है लेकिन राजस्थान सरकार समस्या को लेकर राजनीति कर रही है." गूजरों ने रविवार को अजमेर ज़िले में राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया था. दौसा ज़िले के सिकंदरा मोड़ पर आंदोलनकारियों के मुख्य मार्ग पर धरना दिया था जिसके कारण कारण जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग और सवाई माधोपुर ज़िले में राजस्थान मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला मार्ग अवरुद्ध रहा. ग़ौरतलब है कि गूजरों को जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे हैं. इस आंदोलन के दौरान 37 आंदोलनकारियों की मौत हो चुकी है. पिछले 18 दिनों से चल रहे आंदोलन में ये पहला मौक़ा है जब सरकार और गूजरों के बीच सीधी बातचीत हुई. |
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