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मंगलवार, 03 जून, 2008 को 15:31 GMT तक के समाचार
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गूजरों ने किया शवों का अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार
गूजर आंदोलन में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार किया गया
गत सोमवार को पीलूपुरा में जिन 16 शवों का पोस्टमार्टम किया गया था, उनके परिजनों ने मंगलवार को शवों का अंतिम संस्कार कर दिया है.

इनमें से 11 लोगों का संस्कार उनके पैतृक गाँव में किया गया. शेष पाँच को आंदोलन स्थल पर ही जलाया गया है.

इसी आंदोलन में मारे गए 14 अन्य लोगों के पोस्टमार्टम भी किए जा रहे हैं. इनमें से 12 के पोस्टमार्टम सिकंदरा में किए जा रहे हैं और अन्य दो के सवाई माधोपुर में.

इन 12 लोगों के अंतिम संस्कार को ले कर आंदोलनरत गूजर समाज ने कोई फैसला नहीं लिया है.

इस आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा और पुलिस फ़ायरिंग में 39 लोगों की मौत हो चुकी है.

हांलाकि गूजर अंतिम संस्कारों के लिए मान गए हैं पर उनका आंदोलन अब भी जारी है.

पहले गूजर समाज में यह असमंजस बना हुआ था कि पोस्टमार्टम के बाद शवों का अंतिम संस्कार वहीं किया जाए जहाँ हिंसा की घटना हुई थी या पारंपरिक तरीके से गाँवों में अंतिम संस्कार हो.

कुछ लोगों को ऐसा भी लग रहा था कि पोस्टमार्टम के बाद यदि शवों का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा तो इससे आंदोलन बिखरना शुरू हो जाएगा या कमज़ोर पड़ेगा.

पर सोमवार की रात और फिर मंगलवार को दिन में इस बारे में गूजर समाज के लोगों ने बैठकर बातचीत की और पारंपरिक तरीके से पैतृक गाँवों में ही अंतिम संस्कार करने की सहमति बनी है.

आंदोलन जारी


उधर दिल्ली-जयपुर रेलमार्ग पर गूजरों का प्रदर्शन अभी भी जारी है. इस जगह पर पिछले कुछ घंटों में पुलिस बल भारी तादाद में बढ़ा दिया गया है.

लोगों को अंदेशा है कि पुलिस रात में गूजर नेताओं को गिरफ्तार कर सकती है.

प्रदर्शन की वजह अब तक क़रीब 150 रेलगाड़ियों को रद्द करना पड़ा है. रेलमार्ग पर अब भी गूजर महिलाओं के तंबू लगा कर बैठे होने के समाचार मिल रहे हैं.

रेल विभाग को दो करोड़ रूपए का किराया यात्रियों को वापस लौटाना पड़ा है. हज़ारों की तादाद में यात्री रेल यातायात के ठप्प होने से प्रभावित हुए हैं.

सोमवार को तो स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि रेल यातायात से प्रभावित लोगों को आवागमन की सुविधा मुहैया कराने के लिए राज्य परिवहन निगम को 170 बसों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी.

आंदोलन के दौरान 39 लोगों की मौत की वजह से चौतरफ़ा निंदा झेल रही राज्य सरकार अब प्रदर्शनकारियों के साथ कोई कड़ाई नहीं बरतना चाहती और पुलिस इससे बच रही है.

मुख्यमंत्री की मुश्किलें बढ़ीं

जहाँ गूजरों ने अपना आंदोलन जारी रखा है वहीं भाजपा के एक सांसद के खुलकर मुख्यमंत्री के विरोध में सामने आने से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं.

राज्य की डीग विधानसभा सीट से विधायक दिव्या सिंह ने भरतपुर के विधायक विजय बंसल के हाथों सोमवार को अपना इस्तीफ़ा गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को भिजवा दिया था.

उल्लेखनीय है कि दिव्या सिंह राज्य की भरतपुर संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद विश्वेंद्र सिंह की पत्नी हैं और गूजर बिरादरी से हैं.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद विश्वेंद्र सिंह ने सोमवार को राज्य के सभी गूजर विधायकों और मंत्रियों से अपने-अपने इस्तीफ़े देने की अपील की थी.

उन्होंने अपील करते हुए कहा था कि जिन लोगों ने राज्य में बिरादरी की मदद से कुर्सी पाई है वे बिरादरी के लिए कुर्सी छोड़ने को भी तैयार हों.

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