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चीन के साथ सुरक्षा ढाँचे की पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि चीन के साथ सीमा विवाद के हल के लिए दोनों देशों को धैर्य रखना होगा और वास्तविकता समझनी होगी. चार दिन के चीन दौरे पर गए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत आपसी मतभेदों को द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने में बाधक नहीं बनने देने के लिए प्रतिबद्ध है. पीकिंग विश्वविद्यालय में एक आयोजन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों के 'पेचीदे मुद्दों' को समझने और उनका हल निकालने में सक्षम हैं. उनका कहना था, "हमें बातचीत के ज़रिए इन मतभेदों को सुलझाने की ज़रूरत है." सुरक्षा ढाँचा प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को चीन के विदेश मंत्री यांग हेची से मुलाक़ात की थी जिसमें सिक्किम से सटी सीमा पर चीन के हाल के दावे का मुद्दा उठाया गया. इसमें दोनों देशों ने सीमा पर शांति और सदभाव कायम रखने की प्रतिबद्धता दोहराई. भारतीय विदेश मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि भारत एशिया और उससे आगे शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए चीन के साथ काम करना चाहता है और इसके लिए वह एक नया सुरक्षा ढांचा बनाने का पक्षधर है. उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक राजनीतिक- आर्थिक संस्थानों का पुनर्गठन हो ताकि वे वर्तमान हक़ीकत से मेल खा सकें. विदेश मंत्री ने कहा कि एक ऐसे खुले और विशेष ढांचे की ज़रूरत है जो एशिया में मौजूद बड़ी विविधता को व्यवस्थित करने में पर्याप्त रूप से उदार हों. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मतभेदों का असर संबंधों पर न पड़े'11 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस भारत-चीन का संयुक्त सैनिक अभ्यास20 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस चीन ने की सैन्य खर्च में बढ़ोत्तरी04 मार्च, 2007 | पहला पन्ना चीन ने उपग्रह गिराने की बात मानी23 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना परमाणु समझौते की आलोचना05 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना सामरिक मुद्दों पर भारत-चीन वार्ता09 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस रुस,चीन, भारत के विदेश मंत्री मिलेंगे02 जून, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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