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संदिग्ध हादसे में आठ की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्रप्रदेश में एक संदिग्ध हादसे में एक वरिष्ठ तेलुगू देशम नेता सहित आठ लोग मारे गए हैं. पुलिस का कहना है कि इसके पीछे प्रतिद्वंद्वी गुट का हाथ है. यह नाटकीय हादसा राजधानी हैदराबाद से 300 किलोमीटर दक्षिण में करनूल ज़िले में शनिवार की सुबह हुआ. इस हादसे में एक ट्रक ने एक टाटा सूमो को टक्कर मार दी. पुलिस के प्रवक्ता का कहना है कि जैसे ही ट्रक टाटा सूमो से टकराई तो टाटा सूमो में रखे देशी बमों में विस्फोट हो गया और तेलुगू देशम पार्टी के नेता के वेंकटप्पा नायडू सहित आठ लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. तीन अन्य लोग गंभीर रुप से ज़ख़्मी हुए हैं. पुलिस का कहना है कि मरने वालों में वेंकटप्पा नायडू के भाई शिवशंकर, उनके दो सुरक्षा गार्ड, एक बैंक मैनेजर और सूमो का ड्राइवर शामिल है. ट्रक के ड्राइवर और क्लीनर हादसे के बाद फ़रार हो गए और पुलिस उनकी तलाश कर रही है. पुलिस को शक है कि टाटा सूमो से ट्रक को जानबूझकर टकराया गया था. हालांकि पुलिस अभी साफ़-साफ़ कुछ कह नहीं रही है. करनूल के पुलिस अधीक्षक मधुसूदन रेड्डी का कहना है, "हम पूरी जाँच के बाद ही किसी नतीजे पर पहुँच सकेंगे." पुरानी प्रतिद्वंद्विता तेलुगू देशम पार्टी के नेताओं का आरोप है कि यह उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं को मारने का षडयंत्र था. इस हादसे से नाराज़ वेंकटप्पा नायडू के समर्थक करनूल ज़िले में जगह-जगह सड़क पर आ गए और उन्होंने प्रदर्शन किया. उन्होंने सरकारी संपत्ति और बसों को नुक़सान पहुँचाया. वैसे वेंकटप्पा नायडू की छवि भी साफ़ सुथरी नहीं रही है. उन पर कई आपराधिक मुक़दमे चल रहे हैं और स्थानीय कांग्रेस की नेता वी पद्मा से दुश्मनी चल रही है.
वी पद्मा और उनके परिवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी का समर्थन प्राप्त है. स्थानीय नेता बताते हैं कि जब राज्य में तेलुगू देशम पार्टी का राज्य था तो वेंकटप्पा नायडू ने वी पद्मा और उनके परिवार की संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया था और उन्हें उनके पैतृक गाँव से जाना पड़ा था. वर्ष 2004 में जब चुनाव हुए और राज्य में कांग्रेस की सरकार आ गई तो वी पद्मा वापस आ गईं और तब से वेंकटप्पा नायडू अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उनकी पार्टी के लोगों का कहना है कि उन्हें अपनी जान का ख़तरा था और उन्होंने अपने लिए पुलिस सुरक्षा माँगी थी जो उन्हें कभी नहीं मिली. दक्षिणी आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाक़े के करनूल, कड़प्पा, अनंतपुर और चित्तूर ज़िलों में इस तरह की प्रतिद्वंद्विता और इस तरह की घटनाएँ नई नहीं हैं. कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी समर्थित सशस्त्र गुटों के बीच झड़पें अक्सर होती रहती हैं. पिछले तीन दशक में दोनों गुटों के सैकड़ों लोग इस लड़ाई में मारे गए हैं. तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्राबाबू नाडयू का आरोप है कि 2004 में कांग्रेस की सरकार आने के बाद से उनके सौ से अधिक कार्यकर्ताओं को मार दिया गया है. |
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