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जौहरी बाज़ार का भयावह मंज़र... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जयपुर के जौहरी बाज़ार में मेरी क्लिनिक है. जिस समय वहाँ धमाका हुआ तब मैं अपनी क्लिनिक में मरीज़ देख रहा था. धमाकों के समय और उसके बाद मैनें घटनास्थल का जो मंज़र देखा, वो इस तरह था: जिस समय पहला धमाका हुआ उस समय मैं एक मरीज़ के साथ था. पहला धमाका होते ही जैसे भगदड़ मच गई. बाहर जाकर देखा तो लोग इधर-उधर भाग रहे थे. दो-तीन मीनट बाद ही दूसरा धमाका हुआ. फिर मेरे दवाखाने के पास ही स्थित एलएमवी रेस्टोरेंट के पास तीसरा और सबसे तेज धमाका हुआ. जिसके बाद तो जैसे पूरी दुनिया इधर से उधर भागने लगी. भयावह मंज़र जब वहाँ का मंज़र देखा तो वह बहुत ही भयावह था. मैंने देखा कि घटनास्थल पर पाँच-सात लाशें पड़ी हुई थीं और अनेक घायल लोग तड़प रहे थे. ये तीनों धमाके बहुत कम दूरी पर हुए थे. धमाकों के कुछ देर बाद ही वहाँ पुलिस भी पहुँच गई और घायलों को अस्पताल पहुँचाने का काम शुरु हुआ. जौहरी बाजार इलाके में चार-पाँच मीनट में ही तीनों धमाके हुए. अक्सर मेरी गाड़ी जहाँ खड़ी रहती हैं वहाँ भी एक धमाका हुआ. धामाके के बाद वहाँ भी दृश्य काफ़ी खौफ़नाक था. सात-आठ शव वैसे ही पड़े हुए थे और अन्य शवों को लोग ले जा रहे थे. 10-15 घायल पड़े लोग तड़प रहे थे. शहर में दहशत फैली हुई है. शहर की टेलीफ़ोन की लाइनें जाम हो गई हैं. लोगों के पास हालचाल पूछने के लिए जगह-जगह से फ़ोन आ रहे हैं. शहर में हर तरफ़ अफ़रा-तफ़री मची हुई है. पुराना शहर तो जैसे पूरी तरह खाली हो चुका हैं. पुलिस ने पूरे शहर को घेर लिया है और जाँचकर्ता अपना काम कर रहे हैं. (दिल्ली स्थित बीबीसी संवाददाता पाणिनि आंनद से टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत पर आधारित ) |
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