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बुधवार, 23 अप्रैल, 2008 को 20:23 GMT तक के समाचार
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ईरान का फ़ैसला आईएईए करे: प्रणव
प्रणव मुखर्जी
मुखर्जी ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर संसद की राय लेने का भी आश्वासन भी दिया है
भारत ने कहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है या नहीं इसका फ़ैसला अमरीका को नहीं करना चाहिए और इसे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर छोड़ देना चाहिए.

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी का यह बयान ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की भारत यात्रा पर अमरीकी आपत्ति पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करने के बाद आया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि भारत और ईरान के द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर किसी और की सलाह की ज़रुरत नहीं है.

उल्लेखनीय है कि अहमदीनेजाद 29 अप्रैल को भारत यात्रा पर आ रहे हैं.

अमरीका और कई यूरोपीय देश मानते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है जबकि ईरान इससे इनकार करता है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

 यह प्रमाण देना हमारा काम है नहीं है, बल्कि यह आईएईए का काम है कि वह सबूत जुटाए कि क्या ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है
प्रणव मुखर्जी

प्रणव मुखर्जी ने बुधवार को कहा, "चूँकि ईरान परमाणु अप्रसार संधि में शामिल है इसलिए उसे अंतरराष्ट्रीय संधि के नियमों के पालन की बाध्यता है. लेकिन हम अमरीका से कहना चाहते हैं कि वह यह तय न करे कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है या नहीं और यह काम आईएईए पर छोड़ दे."

बुधवार को दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "यह प्रमाण देना हमारा काम है नहीं है, बल्कि यह आईएईए का काम है कि वह सबूत जुटाए कि क्या ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है."

इस बीच यह मामला बुधवार को संसद में भी उठा.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों ने लोकसभा में यह मामला उठाते हुए कहा कि अमरीका ने ईरान को लेकर जो बयान दिया है उसके लिए सरकार को अमरीका की निंदा करनी चाहिए.

अमरीका को जबाव

इससे पहले अमरीका के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा था कि भारत या दुनिया का कोई भी देश जो ईरान के साथ विचार-विमर्श करता है उसे चाहिए कि वह उसे परमाणु कार्यक्रम बंद करने के लिए राज़ी करने की कोशिश करे.

अमरीकी विदेश मंत्रालय के उप-प्रवक्ता टॉम केसी ये बातें एक संवाददाता सम्मेलन में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कही थीं.

और इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की भारत यात्रा पर अमरीका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान ने भारत का ध्यान खींचा है.

भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना था, "भारत और ईरान प्राचीन सभ्यताएँ हैं जिनके संबंध सैंकड़ों वर्ष पुराने हैं, दोनों ही देश अपने रिश्तों को उचित ध्यान और महत्व देते हैं."

भारतीय बयान में स्पष्ट शब्दों में अमरीका को हिदायत दी गई, "भारत और ईरान दोनों ही देशों को अपने परस्पर संबंधों के मामलों में किसी दिशानिर्देश की ज़रूरत नहीं क्योंकि दोनों ही देश ये जानते हैं कि बातचीत के ज़रिए ही शांति हासिल हो सकती है."

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