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बचपन नहीं जानता सरहदें, न सरहदें... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिता से रोज़-रोज़ की तक़रार अज़हर और उसके चचेरे भाई जोहेब को भारत खींच लाई. मगर इन दो पाकिस्तानी बच्चों ने भारत में दाखिल होने के लिए जो रास्ता चुना, उसने उन्हें सुरक्षा संगठनों के हवाले कर दिया अब 10 बरस के जोहेब को अपने घर की याद सता रही है. पुलिस के अनुसार पाकिस्तान के सूबा सिंध में मीरपुर ख़ास के तांडो अल्लियर कस्बे के इन दोनों लड़कों ने बुधवार को भारत की सीमा में ग़लत तरीके से प्रवेश कर लिया. इन्होंने बाड़मेर से लगती भारत-पाक सीमा पर लगी तारबंदी को लांघा और भारत में दाखिल हो गए. ये दोनों एक सीमावर्ती गाँव में पहुँचे तो गाँववालों ने सीमारक्षकों को इसकी जानकारी दे दी. नतीजा यह है कि अब दोनों को हिरासत में ले लिया गया है और उन्हें पुलिस के सवालों का जवाब देना पड़ रहा है. बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक विपिन पांडे ने बीबीसी को बताया कि इन दोनों बच्चों से पूछताछ की जा रही है. इनमें से अज़हर कहता है कि वो कुछ साल पहले वीज़ा पर जोधपुर अपने रिश्तेदारों से मिलने आ चुका है मगर अज़हर इन रिश्तेदारों का न तो पता बता सका है और न ही नाम. ऐसे किसी रिश्तेदार ने भी अभी तक पुलिस से संपर्क नहीं किया है. 'घर जो छोड़ेगे तो फिर...' इन दोनों के पास पाँच हज़ार रूपए की भारतीय मुद्रा और कुछ पाकिस्तानी मुद्रा मिली है. अज़हर कम बोलता है जबकि जोहेब थोड़ा तेज़ है. जोहेब को अब लग रहा है की वो परायी धरती पर है. कुछ पत्रकार उससे मिले को कहने लगा कि उसका मुल्क़ बहुत अच्छा है और अब वो वापस जाना चाहता है. जोहेब ने बताया कि अज़हर उसके मामा का बेटा है. उसने ही उसे कहा कि उसके पिता बहुत पीटते हैं इसलिए भाग चलना चाहिए. इन दोनों बच्चों का गाँव भारतीय सरहद से कोई डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है. ये पहले खोखरापार पहुँचे. वहाँ से ये पैदल सरहद तक आए और मुनाबाओ के समीप तारबंदी लांघकर भारत में घुस आए. इससे पहले भी एक पाकिस्तानी हिंदू लड़का रमेश इसी तरह इधर चला आया था. उसे सीमारक्षकों ने वापस भिजवा दिया. वर्ष 2003 में एक पाकिस्तानी चरवाहा बालक मुनीर ऐसे ही भटकता हुआ राजस्थान में दाखिल हो गया था. उसे भी भारत ने वापस भेज दिया था. ये बचपन है, सरहदों को नहीं जानता और सियासत की बनाई हुई सरहद इतनी सरल नहीं होती जितना कि ये मासूम बचपन. | इससे जुड़ी ख़बरें बारह साल जेल काटकर पाक चला शरीफ़08 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अवैध प्रवासियों को शरण देने से इनकार06 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी ज़ायरीनों का स्वागत नहीं06 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस उनकी बात जो 'गुमशुदा' हैं05 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी दर्शकों की तलाश में पुलिस06 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी यौनकर्मी पहुँचीं कोलकाता22 जून, 2005 | भारत और पड़ोस वतन से दूर बनाया अपना वतन25 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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