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बुधवार, 02 अप्रैल, 2008 को 12:30 GMT तक के समाचार
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टिकैत को बिजनौर अदालत से ज़मानत

महेंद्र सिंह टिकैत
किसान महेंद्र सिंह टिकैत की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे हैं
मायावती के बारे में पश्चिमी उत्तरप्रदेश के किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत की कथित जातिसूचक टिप्पणी का मामला अब और तूल पकड़ता नज़र आ रहा है.

बुधवार की शाम बिजनौर की अदालत ने महेंद्र सिंह टिकैत को ज़मानत दे दी पर पिछले दो दिनों में टिकैत के गांव में हुई हिंसा के मामले में मुजफ़्फ़रनगर से उनके ख़िलाफ़ एक ताज़ा वारंट जारी हो गया है.

टिकैत को दोबारा गिरफ़्तार करने की कोशिश की जा रही थी. हालांकि पुलिस की इस कोशिश का टिकैत समर्थकों ने पुरज़ोर विरोध किया और उनकी गिरफ़्तारी संभव नहीं हो सकी.

टिकैत ने अदालत परिसर में ही धरना शुरू कर दिया था. उनका कहना था कि बाहर बड़ी तादाद में पुलिस तैनात है और जैसी स्थितियाँ बन रही हैं उससे उनकी जान को ख़तरा है.

पर समर्थकों के समझाने पर उन्होंने अदालत परिसर से धरना समाप्त कर दिया है. फिलहाल टिकैत बिजनौर में ही गढ़ी नाम की जगह पर हैं. वहीं उनकी पार्टी भारतीय किसान युनियन का कार्यालय है जिसमें वो अपने समर्थकों के साथ पहुंचे हुए हैं.

उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के बारे में उनकी कथित जातिसूचक टिप्पणी के मामले में बुधवार को टिकैत को हिरासत में ले लिया गया था.

बुधवार को ही उन्हें बिजनौर की अदालत में पेश किया गया था. यहीं उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.

टिकैत की ज़मानत के वक्त अदालत परिसर में बड़ी तादाद में उनके समर्थक इकट्ठा थे और इसी वजह से पुलिस की ओर से उनकी गिरफ़्तारी आसान नहीं थी.

जज ने स्थितियों को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वे अदालत परिसर से बाहर ही रहें.

गिरफ़्तारी

इससे पहले बुधवार को राजधानी लखनऊ में प्रदेश के गृह सचिव जावीद अहमद ने पत्रकारों को बताया था कि महेंद्र सिंह टिकैत को मुजफ़्फ़रनगर में बिजनौर पुलिस के वारंट के आधार पर पुलिस हिरासत में ले लिया गया है.

दूसरी ओर टिकैत के वकील ने दावा किया था कि उन्होंने बिजनौर की अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी दी थी और वो अपनी मर्जी से वहाँ गए थे.

ग़ौरतलब है कि महेंद्र सिंह टिकैत ने कथित रूप से एक सार्वजनिक सभा के दौरान उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के लिए जातिसूचक टिप्पणियों का इस्तेमाल किया था.

मायावती
मायावती का कहना है कि टिकैत की गिरफ़्तारी उचित और ज़रूरी थी

मज़बूत पकड़ वाले नेता होने के कारण टिकैत की गिरफ़्तारी से पहले मुजफ़्फ़रनगर स्थित महेंद्र सिंह टिकैत के गाँव सिसौली में सैकड़ों की तादाद में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए क्योंकि उनकी गिरफ़्तारी को लेकर गांव में तनाव था और किसान उनकी गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे.

पुलिस पिछले दो दिनों से उनकी गिरफ़्तारी की कोशिश कर रही थी, पुलिस को सोमवार को पीछे हटना पड़ा था कि क्योंकि पथराव और पुलिस फायरिंग में कई लोग घायल हो गए थे.

इसके बाद पुलिस ने टिकैत, उनके चार बेटों और 14 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ जातिवादी टिप्पणी के लिए आपराधिक मामला दर्ज किया. बुधवार को टिकैत को हिरासत में ले लिया गया.

पुलिस पिछले दो दिनों से उनकी गिरफ़्तारी की कोशिश कर रही थी, पुलिस को सोमवार को पीछे हटना पड़ा था क्योंकि पथराव और पुलिस फायरिंग में कई लोग घायल हो गए थे.

राजनीति

बताया जा रहा है कि मायावती टिकैत की कथित टिप्पणी से आहत हैं और उन्होंने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की खिंचाई की थी.

इधर इस मामले पर राजनीति शुरू हो गई थी.विपक्षी पार्टियाँ खुलेआम टिकैत के समर्थन में आ गईं थीं और उनका कहना है कि सरकार बेकार के मुद्दे को बढ़ावा दे रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने टिकैत के सिसौली गाँव से अविलंब पुलिस बल वापस बुलाने की माँग की थी.

मुख्यमंत्री मायावती जाटव समुदाय से हैं जिसकी गिनती कथित तौर पर निचली जाति के रुप में होती है जबकि टिकैत जाट समुदाय से आते हैं.

ये दोनों समुदाय राजनीतिक बिसात पर भी बँटे हुए हैं. जहाँ जाटव बसपा समर्थक माने जाते हैं, वहीं जाट विरोधी खेमे के समर्थक माने जाते हैं.

प्रेक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती टिकैत के ख़िलाफ़ बेहद कड़ा रूख़ अपना रही हैं ताकि पिछड़ी और दलित जातियों में पैठ को और मज़बूत किया जा सके.

लेकिन ये रणनीतिक चूक भी साबित हो सकती है क्योंकि टिकैत चर्चित किसान नेता हैं और उनकी भारतीय किसान यूनियन की शाखाएँ राज्य के कई हिस्सों में फैली हुईं हैं.

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