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छठे वेतन आयोग ने रिपोर्ट सौंपी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में आम बजट में कर्ज़माफ़ी की घोषणा से राहत की आस लगाए किसानों के बाद अब ख़ुश होने की बारी केंद्रीय कर्मचारियों की है. करीब चालीस लाख़ केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बने छठे वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट वित्तमंत्री पी चिदंबरम को सौंप दी है. कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि अगर सरकार आयोग की सिफ़ारिशों को मान लेती है तो वेतन में 40 फ़ीसदी की वृद्धि संभव है. वेतन आयोग की सिफ़ारिशें लागू होने पर राज्यों में भी इसका असर दिख सकता है क्योंकि तब वहाँ के कर्मचारी भी अपना वेतन बढ़ाने की माँग करेंगे. केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-भत्तों की समीक्षा करने के लिए सरकार ने वर्ष 2006 में इस आयोग का गठन किया था. इसके प्रमुख जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण हैं. काँट-छाँट की उम्मीद कम
सरकारी समाचार संगठन दूरदर्शन का कहना है कि आयोग की अनुशंसाओं में कर्मचारियों के वेतन में 52 फ़ीसदी तक की बढ़ोत्तरी शामिल है. इसके अलावा यह भी बताया गया है कि वेतन आयोग ने कर्मचारियों का किराया और परिवहन भत्ता बढ़ाने की भी सिफ़ारिश की है. आम चुनाव नज़दीक हैं. इसको देखते हुए कई राजनीतिक संगठनों का मानना है कि सरकार आयोग की सिफ़ारिशों को बिना ज़्यादा काँट-छाँट के मंज़ूर कर लेगी. ख़बरें हैं कि रिपोर्ट को सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद आयोग की ये सिफ़ारिशें 1 जनवरी, 2006 की तारीख़ से ही लागू मानी जाएँगी. हालाँकि वित्तमंत्री ने वेतन बढ़ोत्तरी के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है लेकिन उन्होंने यह कहा था कि इसके लिए पर्याप्त गुंजाइश है. |
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