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कश्मीर में मुठभेड़, पाँच की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में रविवार सुबह सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच हुई मुठभेड़ में पाँच लोग मारे गए हैं. मारे जाने वालों में तीन पुलिस वाले, एक सीआरपीएफ़ का जवान और एक लश्कर-ए-तोयबा का कमांडर शामिल हैं. श्रीनगर में सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच रविवार सुबह शुरू हुई ये मुठभेड़ दोपहर तक चली. इस मुठभेड़ में दो पुलिसवाले घायल भी हुए हैं. श्रीनगर के बाहरी हिस्से तलबल में ये मुठभेड़ उस वक्त शुरू हुई जब सुरक्षा बल के जवानों ने वहाँ छिपे चरमपंथियों को घेरकर हमला कर दिया. दोनों तरफ़ से खूब गोलियाँ चलीं. दोपहर तक ये गोलीबारी होती रही. सीआरपीएफ के प्रवक्ता सुधांशु सिंह के मुताबिक़ एक चरमपंथी भागने में बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ सुरक्षा बलों ने तलबल के नज़दीक एक गांव को घेर लिया है और आगे भी मुठभेड़ शुरू हो सकती है. पाँच दिनों में दूसरा हमला पिछले पाँच दिनों में श्रीनगर में हुआ ये दूसरा हमला है. रविवार सुबह हुई मुठभेड़ के बाद चरमपंथियों और भारत प्रशासित कश्मीर की सरकार के बीच छह महीने से बनी शांति ख़त्म होती दिखाई दे रही है. चरमपंथी ताकतों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में मारे जाने वाले लोगों का ये इस साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है. तीन दिन पहले बुधवार को भी चरमपंथियों ने श्रीनगर के जहांगीर चौक फ्लाई ओवर को निशाना बनाया था. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. जबकि 20 से ज़्यादा लोग इस हमले में घायल हो गए थे. फ्लाई ओवर के नीचे बनी अस्थाई पुलिस चौकी में 'इंप्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस' यानी आईईडी के ज़रिए ये धमाका किया गया था. सीआरपीएफ़ के प्रवक्ता सुधांशु सिंह के अनुसार पिछले दिनों ठंड के दौरान सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच काफ़ी मुठभेड़ हुई हैं जिनमें अलग-अलग संगठनों के कई कमांडर मारे जा चुके हैं. इसलिए चरमपंथी गुटों का दोबारा एकजुट होना मुश्किल है. उनका कहना है कि इस बार गर्मियों के मौसम में कश्मीर में शांति बनी रहने की उम्मीद है. | इससे जुड़ी ख़बरें कई महीने बाद श्रीनगर में धमाका20 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस कश्मीर को लेकर प्रतिबद्ध हैं: कियानी13 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस कश्मीर में कुछ स्थानों से सेना हटेगी29 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कश्मीर और परमजीत की प्रेमकहानी05 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'आशा हो, तभी ज़िंदा रह सकते हैं' 04 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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