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हॉक विमान वायु सेना में शामिल होंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटिश एयरोस्पेस सिस्टम्स (बीएई) के हॉक प्रशिक्षण विमानों को शनिवार को भारतीय वायु सेना में शामिल कर लिया जाएगा. इसके साथ ही भारतीय वायु सेना आधुनिक प्रशिक्षण विमान, हॉक इस्तेमाल करनेवाली दुनिया की 19 वीं वायु सेना बन जाएगी. ब्रिटिश एयरोस्पेस ने अब तक भारतीय वायु सेना को आठ विमान सौंपे हैं. उसे कुल 66 विमान सौंपने हैं. इनमें से 24 ब्रिटेन में तैयार होंगे और बाकी के 42 विमान बीएई के सहयोग से हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड तैयार करेगा. हॉक आमतौर पर पॉयलटों के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल होते हैं लेकिन युद्ध की स्थिति में इनसे ज़मीन पर हमले किए जा सकते हैं. ज़रूरत दरअसल नए पायलटों के विमान उड़ाते वक्त दुर्घटनाग्रस्त होने की कई घटनाओं के बाद 1985 में भारतीय वायु सेना ने प्रशिक्षण विमान की तलाश शुरू की थी. ये तो मान लिया गया था कि भारत को प्रशिक्षण विमानों की सख़्त आवश्यकता है और इसको लेकर पिछले एक दशक से बातचीत चल रही थी. पिछले कुछ वर्षों में वायु सेना में विमान दुर्घटनाएँ काफ़ी बढ़ी हैं और इसको लेकर चिंता जताई जा रही थी. दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण यह बताया जाता है कि प्रशिक्षण विमान के अभाव में पायलटों को मिग विमानों पर प्रशिक्षण दिया जाता था. सन् 1999 में इस सौदे के लिए फ़्रांस की कंपनी दासॉल के अल्फ़ाजेट और ब्रिटिश एयरोस्पेस के हॉक विमानों का चयन किया गया था. लेकिन इसकी कीमत को लेकर यह मामला उलझता रहा. लेकिन बाद में ब्रिटिश एयरोस्पेस सिस्टम से 66 हॉक प्रशिक्षण विमानों की ख़रीद के लिए समझौता हो गया था. |
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