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मिग-21 विमानों से पीछा छुड़ाने का निर्णय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आख़िरकार भारतीय वायुसेना ने लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे मिग-21 लड़ाकू विमानों से छुटकारा पाने का निर्णय लिया है. वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल एस कृष्णास्वामी ने बुधवार को कहा है कि रुस में बने 70 मिग-21 का उपयोग अगले साल से बंद कर दिया जाएगा. इनमें से कुछ मिग-21 तो 30 साल पुराने भी हैं. समझा जा रहा है कि ब्रिटेन में बने हॉक प्रशिक्षण विमान इनकी जगह लेंगे. पिछले कुछ सालों में मिग-21 लगातार दुर्घटनाओं का शिकार होते रहे हैं. पिछले एक दशक में लगभग सौ वायुसेना पायलटों की मिग-21 के साथ दुर्घटना में मौत हो चुकी है. इसके लिए भारतीय वायुसेना में प्रशिक्षु विमानों के न होने को भी दोषी माना जाता है, क्योंकि इसी के चलते भारतीय पायलटों को प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है. बैगलोर में पत्रकारों से बात करते हुए एयर चीफ़ मार्शल कृष्णास्वामी ने कहा, "हमें किसी भी लड़ाकू विमानों से अधिक प्रशिक्षु विमानों की ज़रुरत है." उल्लेखनीय है कि पिछली सरकार ने ब्रिटेन से 1.45 अरब डॉलर मूल्य के 66 हॉक प्रशिक्षु विमान ख़रीदने का निर्णय लिया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड मिग-27 और ब्रिटेन में बने जगुआर विमानों में सुधार कर रहा है. |
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