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वायु सेना में पायलटों की कमी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय वायु सेना पायलटों की कमी की समस्या से जूझ रही है और कई पायलट ऐसे हैं जो ये नौकरी छोड़ना चाहते हैं. बीबीसी की विशेष पड़ताल से पता चला है कि कम से कम 200 पायलट नौकरी छोड़ना चाहते हैं. पायलटों ने कामकाज की ख़राब स्थिति और परिवार से दूरी को इस फैसले का कारण बताया है. लेकिन इन पायलटों का कहना है कि वायु सेना उन्हें नौकरी छोड़ने की अनुमति नहीं दे रही है. एक पायलट ने तो नौकरी छोड़ने की अनुमति नहीं मिलने पर हताश होकर आत्महत्या का प्रयास किया. भारतीय वायु सेना का कहना है कि समय पूर्व रिटायरमेंट की अर्ज़ी पर काफ़ी जाँच-पड़ताल के बाद फ़ैसला होता है. कई कार्यरत पायलटों ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि वे परिवार से दूर रहकर नौकरी करने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं. उनका कहना है कि कामकाज की बिगड़ती हालत और "बढ़ती चापलूसी की संस्कृति" के कारण वायु सेना में नौकरी करना मुश्किल होता जा रहा है. उनका कहना है कि अधिकारी उन्हें नौकरी छोड़कर जाने नहीं दे रहे हैं जिससे स्थिति बिगड़ती जा रही है. आंकड़े बीबीसी को मिले आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2002 से 2004 के बीच 263 पायलटों को वायु सेना ने नौकरी छोड़ने की अनुमति दी थी. लेकिन इसके बाद वर्ष 2005 में सिर्फ़ आठ पायलटों को ही नौकरी छोड़ने की अनुमति दी गई. बीबीसी को ऐसे गोपनीय दस्तावेज़ मिले हैं जो ये दिखाते हैं कि एक पायलट को नौकरी से मुक्ति तब मिली जब उसने एक सांसद से इसके लिए चिट्ठी लिखवाई. मानसिक परेशानी वायु सेना में दस वर्ष से अधिक समय तक नौकरी कर चुके एक अन्य पायलट ने बताया कि नौकरी छोड़ने की अनुमति नहीं मिलने के कारण वे दुखी हैं और महसूस करते हैं कि उनके साथ अन्याय हुआ है. उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं अपनी ज़िंदगी के क़ीमती साल देश को दे चुका हूँ, अब मैं ऐसी क्या चीज़ माँग रहा हूँ, सिर्फ़ अपने परिवार के साथ रहना चाहता हूँ, उसके लिए भी मना किया जा रहा है." उन्होंने कहा, "मेरे अधिकारियों ने कहा कि मैं मुँह बंद रखूँ वरना मेरा तबादला ऐसी जगह कर दिया जाएगा जहाँ मैं कुछ भी नहीं कर सकूँगा." जिस पायलट ने आत्महत्या करने का प्रयास किया था उनकी मनोचिकित्सा सैनिक अस्पताल में चल रही है. बीबीसी को दिए गए एक लिखित जवाब में भारतीय वायु सेना ने कहा, "अगर कोई अधिकारी वायु सेना से समय से पहले रिटायर होना चाहता है तो उनके आवेदन की जाँच की जाती है जब जाँच में पाया जाता है कि मामला ठीक है तो रिटायर होने की अनुमति दी जाती है."
कई पायलटों का कहना है कि वायु सेना का यह दावा ग़लत है कि उन्हें मुफ़्त में रहने के लिए मकान जैसी सुविधा दी जाती है. वायु सेना में पंद्रह वर्ष से अधिक समय तक नौकरी कर चुके एक पायलट ने कहा, "आप बड़े शहर में रहें या छोटे शहर में, आपको रहने के मकान के नाम पर दो छोटे छोटे कमरे ही मिलते हैं." वे कहते हैं, "अगर आप दो साल की पोस्टिंग पर हों तो हर छह महीने में आपको घर बदलना होता है, इसमें कितना तनाव होता है यह उन्हीं से पूछिए जिन्हें इससे गुज़रना होता है." वायु सेना का कहना है कि लोगों को नौकरी शर्तें सेवा शुरू करने से पहले ही बता दी जाती हैं और फिर इन लोगों को पायलट बनाने में लाखों रूपए ख़र्च किए जाते हैं. वायु सेना की ओर से जारी जवाब में कहा गया है, "हमें सुनिश्चित करना होता है कि पायलटों के पद ख़ाली न हों क्योंकि अगर लड़ाकू विमानों के पायलटों की कमी हुई तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है." लेकिन स्थिति इसलिए जटिल हो गई है क्योंकि बहुत सारी निजी विमान कंपनियाँ बाज़ार में आ गई हैं जिन्हें प्रशिक्षित पायलटों की आवश्यकता है, उनका मानना है कि वायु सेना के पायलट सबसे बेहतर विकल्प हैं. जब बीबीसी ने एक पायलट से पूछा कि क्या वे और उनके साथी वायु सेना इसलिए छोड़ना चाहते हैं ताकि वे निजी कंपनी में मोटी तनख्वाह पर नौकरी कर सकें तो उन्होंने कहा, "इसमें क्या बुराई है, अगर हम व्यावसायिक पायलट बनना चाहें, हमने अपने जीवन का बेहतरीन हिस्सा देश को दे दिया है." वे कहते हैं, "आपको व्यावसायिक पायलट के लाइसेंस के लिए आवदेन करने वालों की सूची देखनी चाहिए, आप यह देखकर दंग रह जाएँगे कि ज़्यादातर लोग वरिष्ठ अधिकारियों के रिश्तेदार हैं या फिर कुछ मामले में तो स्वयं वरिष्ठ अधिकारी ही आवेदन कर रहे हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें पाक वायुसेनाध्यक्ष की मौत | भारत और पड़ोस मिग दुर्घटना में दो लोग मरे | भारत और पड़ोस सौदा भारत का, ख़र्च अमरीकी | भारत और पड़ोस जगुआरों के मलबे का पता लगा03 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस महिला अधिकारी के ख़िलाफ़ जाँच शुरू21 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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