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परिसीमन को राष्ट्रपति की मंज़ूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगले लोकसभा चुनावों से पहले भारत का राजनीतिक नक्शा बदला हुआ होगा क्योंकि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में परिसीमन को मंज़ूरी दे दी है. यानी आगामी लोक सभा चुनाव नए संसदीय क्षेत्रों के दायरे में फ़ेरबदल करने के बाद कराए जाएंगे लेकिन पाँच राज्यों को इससे छूट रहेगी. पूर्वोत्तर के चार राज्यों- असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड में परिसीमन लागू नहीं होगा. झारखंड में भी कार्रवाई पूरी नहीं हो पाने की वजह से यहाँ भी परिसीमन नहीं किया जा रहा है. फ़िलहाल पूर्वोत्तर के दो राज्यों मेघालय और त्रिपुरा में परिसीमन लागू नहीं होगा क्योंकि यहाँ जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं और इन चुनावों के लिए तैयारियां तक़रीबन पूरी कर ली गईं हैं. बाक़ी राज्यों में परिसीमन को 20 मार्च के बाद लागू किया जाएगा लेकिन, राष्ट्रपति की इस मंज़ूरी के बाद कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन इसी साल मई के अंत तक ख़त्म हो रहा है और उससे पहले वहाँ चुनाव कराए जाने हैं. दरअसल, चुनाव आयोग पहले ही संकेत दे चुका है कि उसे कर्नाटक में परिसीमन की कार्रवाई पूरी करने में कम से कम तीन महीने का समय और लगेगा. परिसीमन की मुश्किलें ग़ौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले हफ्ते ही परिसीमन की सिफ़ारिश राष्ट्रपति से की थी. राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता के अनुसार परिसीमन को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा जिसके बाद संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं काफ़ी बदली हुई होंगी. परिसीमन का काग़ज़ी काम देश की 3, 726 विधानसभा सीटों और 513 संसदीय सीटों के लिए पूरा किया जा चुका है लेकिन, इस परिसीमन ने देश के कई नेताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. कई मशहूर राजनीतिक हस्तियों को अब अपने लिए नई सीटें तलाशनी होंगी क्योंकि परिसीमन से इनकी पारंपरिक सीटें अब आरक्षित सीटों में तब्दील हो गई हैं. परिसीमन की गाज लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी, गृह मंत्री शिवराज पाटिल, भाजपा नेता कल्याण सिंह के अलावा अभिनेता से नेता बने धर्मेंद्र और राज बब्बर पर गिरी है. इन सभी नेताओं की सीटें अब आरक्षित घोषित कर दी गई हैं. |
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