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प्यार का ना कोई मज़हब ना ही भाषा है... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तसव्वुर के मोबाइल की घंटी बजी और टैक्सी चलाते चलाते चलाते उन्होंने एक बड़ी सी मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया – आज के दिन याद किया तुमने. कितनी अच्छी बात है. बहुत देर तक वो बात करते रहे और फिर फ़ोन बंद करके मुझसे कहा – छोटी भतीजी का फ़ोन था. वैलेंटाइन डे के “त्यौहार” पर मुबारकबाद दे रही थी. आम चुनाव पर नौजवान पीढ़ी की राय लेने के लिए कुछ देर बाद हम युनिवर्सिटी ऑफ़ पंजाब के राजनीति शास्त्र विभाग पहुँचे तो देखा कि वहाँ की खिड़कियों के शीशों पर सुर्ख़ रंग के ताज़ा फूल टँगे हुए थे. “आज वैलेंटाइंस डे का त्यौहार है ना, इसीलिए लगाए गए हैँ”, ग्रैजुएशन कर रही एक लड़की ने बताया. लाहौर के बाज़ारों में दुकानों को गुलाबी रंगों से सजाया गया था, लोग वैलेंटाइंस डे के “त्यौहार” के लिए शॉपिंग कर रहे थे. 14 फ़रवरी को प्यार का इज़हार करने की ये परंपरा पश्चिम में जैसे भी शुरू हुई हो, लाहौरिए अब इसे त्यौहार कहने लगे हैं. एक ऐसे ही और त्यौहार की तैयारियाँ भी यहाँ कुछ दिनों में शुरू हो जाएगी. लाहौर के लोगों के लिए वसंत से बड़ा उत्सव शायद और कोई नहीं होता. हर साल मौलवी जमातें वसंत मनाने वालों की “सख़्त मज़म्मत” यानी कड़ी आलोचना करते हैं. इसे हिंदुओं का त्यौहार बताते हैं और हर साल वसंत के दिन लाहौर का आसमान रंग बिरंगी पतंगों भर जाता है – जैसे छींट की कोई चादर हो. हालाँकि इस शहर के हिंदू साठ साल पहले हिंदुस्तान चले गए थे. लेकिन लाहौर में मानता कौन है कि वसंत का त्यौहार हिंदुओं का ही है और मुसलमानों को इससे दूर रहना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें चुंबन का नया विश्व रिकॉर्ड बना15 फ़रवरी, 2004 | पहला पन्ना विरोध के बीच मनाया गया वैलेंटाइन्स डे14 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस देहरादून में वेलेंटाइन्स डे पर अनोखी पहल14 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस दुनिया भर में वैलेंटाइन्स डे के कई रंग14 फ़रवरी, 2004 | पहला पन्ना वैलेंटाइन्स डे : नया ज़माना, नए तरीक़े13 फ़रवरी, 2004 | कारोबार एक प्रेम पत्र प्रतियोगिता01 फ़रवरी, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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