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गुरुवार, 31 जनवरी, 2008 को 23:31 GMT तक के समाचार
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कम नहीं हो रही हैं मुशर्रफ़ की मुश्किलें
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्दी उतार दी है पर उनका विरोध कम नहीं हो रहा है
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का रास्ता सेना की वर्दी उतारने के बाद भी आसान नहीं होता नज़र आ रहा है.

राजनीतिक दलों, वकीलों, न्यायाधीशों और पत्रकारों की आंखों की किरकिरी बनने के बाद अब राष्ट्रपति को सेना के कुछ पूर्व जनरलों की ओर से भी विरोध झेलना पड़ रहा है.

गुरुवार रात राजधानी इस्लामाबाद में पूर्व सैनिकों की एक बैठक हुई जिसमें राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की निंदा की गई और उनके इस्तीफ़े की माँग दोहराई गई.

ग़ौरतलब है कि कुछ अर्से पहले भी सेना के कुछ रिटायर्ड जनरलों ने राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए उनसे इस्तीफा माँगा था. इनमें कुछ ऐसे अधिकारी भी शामिल थे जो मुशर्रफ़ के साथ सेना में काम कर चुके थे.

पूर्व सैनिकों की इस माँग पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने अपनी यूरोप यात्रा के दौरान कहा था कि ऐसा वे लोग कह रहे हैं जिन्हें उन्होंने नौकरियां नहीं दी हैं.

पर पूर्व सैनिक राष्ट्रपति की इस टिप्पणी से और ज़्यादा क्षुब्ध हुए हैं और उन्होंने ऐसे बयान की निंदा करते हुए राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की माँग दोहरा दी है.

तीखी आलोचना

पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल असलम बेग इस मामले में हुई पूर्व सैनिकों की बैठक के बारे में बताते हैं, "हमारा मकसद है कि सेना की छवि को जो नुकसान पिछले कुछ समय में पहुँचा है, उसे फिर से बहाल किया जाए. साथ ही सरकार को बताया जाए कि वो किस तरीके से एक बेहतर लोकतंत्र की ओर बढ़ सकती है."

जनरल असलम बेग
 हमारा मकसद है कि सेना की छवि को जो नुकसान पिछले कुछ समय में पहुँचा है, उसे फिर से बहाल किया जाए. साथ ही सरकार को बताया जाए कि वो किस तरीके से एक बेहतर लोकतंत्र की ओर बढ़ सकती है

जनरल असलम बेग ने कहा कि जबतक परवेज़ मुशर्रफ़ सत्ता में हैं, देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव नहीं हो सकते हैं.

इस बैठक में राष्ट्रपति की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए एक कैप्टन कहते हैं कि परवेज़ मुशर्रफ़ भाई को भाई से लड़ाने का काम कर रहे हैं और इससे सेना की छवि भी दागदार हुई है.

वो कहते हैं कि अगर इसे लेकर सेना के बाकी के लोग गंभीर नहीं होते हैं तो बेहतर होगा कि वे लोग चूड़ियाँ पहन लें.

बैठक में सरकारी पुरस्कार वापस करने, राष्ट्रपति के कार्यक्रमों और चुनावों का बहिष्कार करने, फ़ोर स्टार अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति के पास भेजने और पेंशन बुक वापस करने के प्रस्तावों पर विचार किया गया.

पूर्व सैनिकों ने यह भी फ़ैसला लिया है कि पाँच फ़रवरी को होनेवाले वकीलों और पत्रकारों के प्रदर्शन को वे अपना समर्थन देंगे और उसमें शामिल होंगे.

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