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मुंबई की सड़कों के नए हमसफ़र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नए वर्ष 2008 की शुरुआत से ही मुंबई की सड़कों पर कॉलेज की छात्राएं टैक्सी चलाती नज़र आ रही हैं. मुंबई में महिलाओं की असुरक्षा को देखते हुए फुलोरा फाउंडेशन नामक एक टैक्सी कंपनी ने यह क़दम उठाया है. सबसे बड़ी बात यह है कि इन छात्राओं को इसके लिए पूरी तरह से तैयार भी किया जा रहा है. इन लड़कियों को जूडो-कराटे, पर्सनालिटी डेवेलपमेंट के साथ-साथ अन्य ज़रूरी चीज़ों की भी शिक्षा दी जा रही है. फुलोरा फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी अरुण सबनीस कहते हैं, " मुंबई में महिलाओं के साथ हो रही घटनाओं को देखते हुए हमने इसकी शुरुआत की है. रात को सफ़र कर रही महिला को हमारी महिला ड्राइवर ही ले जाएँगी, जिससे वो अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी." इन छात्राओं को एमटीडीसी और इंडियन टूरिज़्म की तरफ़ से भी सर्टिफ़िकेट दिए जाएँगे जिससे ये ड्राइवर के साथ साथ गाइड का काम भी कर सकेंगी. सबनीस ने कहा, "आमतौर पर हमारे ड्राइवर की 12 घंटे की ड्यूटी होती है, लेकिन इन लड़कियों के आ जाने से उन्हें भी राहत मिलेगी. फ़िलहाल ये लड़कियाँ पार्ट टाइम काम करेंगी लेकिन ज़रूरत पड़ने पर इन्हें फुल टाइम भी रखा जा सकता है." सुरक्षा बी कॉम की छात्रा, 19 वर्षीय राजश्री राणे अपनी पढ़ाई के साथ इस काम के लिए काफ़ी उत्साहित हैं.
वो कहती हैं, "मैं इस काम से बहुत ही उत्साहित हूँ, क्योकि इसमे ऑफ़िस की तरह समय समय पर आना-जाना नहीं पड़ेगा और मैं इसे अपने कॉलेज के साथ ही कर सकती हूँ." 28 वर्षीय मोहिनी काले मुबंई के एक स्कूल में पढ़ाती हैं और बचे हुए समय में ये काम करेंगी. वो कहती हैं, " स्कूल से आने के बाद मेरे पास बहुत समय बचता था, लेकिन अब यह काम करके समाज सेवा के साथ ही समय भी निकल जाएगा और कुछ पैसे भी आ जाऐंगे. शहर में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो रात के समय पुरुष ड्राइवर के साथ जाने में हिचकिचाती हैं, लेकिन अब वो रात को भी हमारे साथ आराम से सफ़र कर सकेंगी." ऐसा नहीं है कि यहाँ हर कोई पढ़ा हुआ ही है, कई कम पढ़े लिखे तो कई एकदम अनपढ़ भी है. 23 वर्षीय सारिका शिंदे उन्ही में से एक हैं. सारिका अनपढ़ हैं लेकिन उनकी ड्राइविंग कला और हिम्मती स्वभाव को देखते हुए इन्हें यह मौक़ा दिया गया है. वो कहती हैं, " मुझे गाड़ी चलाना बहुत पसंद है और यहाँ आने से पहले मैं स्कूल की गाड़ी चलाया करती थी. मैं कराटे की चैंपियन हूँ और अपने सामने आने वाली हर मुसीबत का सामना कर सकती हूँ." इन लड़कियों के लिए हरे रंग का शर्ट और काले रंग की यूनिफॉर्म होगी और महीने में इन्हें कम से कम चार हज़ार रुपए की आमदनी भी होगी. कंपनी ने शुरुआत में क़रीब 20 करोड़ का निवेश किया है और तक़रीबन 600 गोल्ड टैक्सी मुंबई की सड़कों पर दिन रात दौड़ रही हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नए साल में महिलाओं के साथ बदसलूकी02 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस बदसलूकी मामले में कई हिरासत में 03 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'बार बालाओं का शराब परोसना सही'06 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस फिर की गई महिलाओं की उपेक्षा19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सुदूर गाँव की रत्नाबेन हैं मोटर मैकेनिक03 जून, 2006 | भारत और पड़ोस अंधेरी ज़िंदगी में उम्मीद की नई किरण23 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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