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बिलक़ीस मामले में 11 को उम्र क़ैद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई की एक अदालत ने 2002 में गुजरात दंगों के दौरान बिलक़ीस बानो के साथ बलात्कार मामले में 11 लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है. जबकि पुलिस अधिकारी सोमभाई गोरी को तीन साल की जेल की सज़ा दी गई है. कोर्ट ने सोमभाई को दोषियों का बचाव करने का आरोप लगाया था. जिन लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है उनके नाम हैं- जसवंतीभाई नाई, गोविंदभाई नाई, शैलेष भट्ट, राधेश्याम शाह, बिपीन जोशी, केसरभाई वोहानिया, प्रदीप मोरधीया, बाकाभाई वोहानिया, राजनभाई सोनी, नितेश भट्ट और रमेश चंदाना. एक अन्य दोषी को भी सज़ा सुनाई गई है जिसकी कुछ समय पहले मौत हो चुकी है. इसके अलावा चार गवाहों पर झूठी गवाही देने के लिए मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया है.अदालत के बाहर और अंदर पुलिस का भारी व्यवस्था थी. आरोप बिलक़ीस बानो का आरोप था कि गोधरा रेल आगज़नी काँड के बाद गुजरात में भड़के दंगों के दौरान उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसे मरा हुआ जानकर छोड़ दिया गया. कुछ दिन पहले मुंबई के सत्र न्यायालय ने बिलकीस बानो के साथ बलात्कार मामले में 13 लोगों को दोषी क़रार दिया था. 2002 दंगों के दौरान अनेक इलाक़ों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी और उसने बिलक़ीस बानो की ज़िंदगी में भूचाल ला दिया. दंगों में बिलक़ीस बानो के परिवार के अनेक सदस्यों को निशाना बनाया गया जिनमें से आठ मारे गए और छह लापता हो गए. बिलक़ीस बानो ने कहा था कि उसने अपने परिवार को 14 सदस्यों को मरते हुए देखा है लेकिन गुजरात सरकार ने उस मामले को बंद कर दिया था और सभी अभियुक्तों को ज़मानत पर रिहा कर दिया था. उसके बाद बिलक़ीस बानो ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. बिलक़ीस बानो मामले में 20 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था जिनमें से 13 को दोषी क़रार दिया गया. इनमें छह पुलिसकर्मी थे. भयावह दौर बिलक़ीस बानो के अलावा पूर्व कांग्रेस सांसद अहसान जाफ़री, नरोदा-पटिया, बेस्ट बेकरी और ज़ाहिरा शेख़ मामले भी गुजरात दंगों के कारण ख़ासी चर्चा में रहे हैं. यह मुक़दमा शुरू तो अहमदाबाद में हुआ था लेकिन बिलक़ीस बानो ने आशंका जताई थी कि गवाहों को नुक़सान पहुँचाया जा सकता है और सबूतों के साथ भी छेड़छाड़ की जा सकती है. इसलिए मुक़दमे की सुनवाई गुजरात से बाहर करने की गुज़ारिश की गई थी. भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध पर 2004 में इस मुक़दमे की सुनवाई मुंबई में कराने के आदेश दिए थे. यह मुक़दमा मूल रूप से 2003 में शुरू हुआ था और इस दौरान एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है. अभियुक्तों पर ख़तरनाक हथियार ले जाने, घरों में लूटपाट करने और आग लगाने, महिलाओं के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप लगे थे. | इससे जुड़ी ख़बरें बिलक़ीस ने न्याय की उम्मीद जताई08 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस बिलकीस मामला: सुनवाई महाराष्ट्र में06 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस बिलकीस मामले में आरोपपत्र दाख़िल19 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस बिलकीस मामले में सीबीआई ने रिपोर्ट सौंपी12 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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