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'पाकिस्तानी परमाणु हथियार सुरक्षित' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के उस बयान की कड़ी आलोचना की है जिसमें पाकिस्तानी परमाणु हथियारों के चरमपंथी हाथों में जाने की आशंका जताई गई है. आईएईए प्रमुख मोहम्मद अल बरादेई ने एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में आशंका जताई थी कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार इस्लामी चरमपंथियों के नियंत्रण में जा सकते हैं. उनके हवाले से अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान में चरमपंथी सत्ता जड़ें जमा सकती है जिसके पास लगभग 40 परमाणु हथियार हैं. दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना का कहना है कि देश के परमाणु हथियारों की सुरक्षा प्रणाली 'फुलप्रूफ़' है. 'दुष्प्रचार अभियान' पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक़ ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा संस्था के प्रमुख के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा है, "पाकिस्तान एक ज़िम्मेदार परमाणु हथियार संपन्न देश है. हमारे परमाणु हथियार किसी अन्य परमामु शक्ति संपन्न देश की तरह सुरक्षित हैं." वो कहते हैं, "इसलिए हमारा मानना है कि परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर जताई जा रही चिंता अवांछित और ग़ैर ज़िम्मेदाराना है." उन्होंने यहाँ तक कहा कि 'अल बरादेई को कोई भी बयान सावधानीपूर्वक देनी चाहिए जो उनके अधिकार क्षेत्र में हो'. मोहम्मद सादिक़ ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद पाकिस्तान और उसके राष्ट्रीय संस्थानों के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया. राजनीतिक संकट संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तानी परमाणु हथियारों को लेकर चिंताएँ बढ़ती जा रही है. पाकिस्तान 'आंतकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' में अमरीका का प्रमुख सहयोगी देश है. अल बरादेई ने अरबी अख़बार अल हयात के साथ बातचीत में चिंता जताते हुए कहा था कि परमाणु हथियार पाकिस्तान या अफ़ग़ानिस्तान के किसी चरमपंथी गुट के क़ब्ज़े में जा सकता है. अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों में मुख्य दावेदार बन कर उभर रहीं डेमोक्रैट सीनेटर हिलेरी क्लिंटन ने पिछले हफ़्ते कहा था कि चुनाव जीतने पर वो पाकिस्तानी परमाणु हथियारों के निरीक्षण के लिए अमरीका और ब्रिटेन की साझा टीम गठित करने का समर्थन करेंगी. |
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