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मंगलवार, 08 जनवरी, 2008 को 12:53 GMT तक के समाचार
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मीडिया निजता का सम्मान करे: बिलावल
बिलावल
बिलावल ने कहा कि पढ़ाई ख़त्म होने के बाद उनका राजनीतिक जीवन शुरू होगा
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने मीडिया से अनुरोध किया है कि वे उनकी निजता का सम्मान करे और उन्हें अकेला छोड़ दें.

बेनज़ीर भुट्टो की 27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान में हत्या कर दी गई थी जिसके बाद बिलावल को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था.

लंदन में हुई एक पत्रकार वार्ता में बिलावल ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उनकी निजता का सम्मान किया जाएगा.

बिलावल ने बताया कि जब तक उनकी पढ़ाई जारी है उनके पिता आसिफ़ अली ज़रदारी पार्टी का नेतृत्व करेंगे.

'अकेला छोड़ दें'

अमरीका पर राय
 अगर अमरीका तानाशाहों को समर्थन देना छोड़ दे तो कट्टरवाद से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है
बिलावल भुट्टो ज़रदारी

एक हफ़्ते पहले पार्टी का नेता चुने जाने के बाद ये पहला मौका था जब 19 वर्षीय बिलावल ने दुनिया भर के पत्रकारों को संबोधित किया.

बिलावल ने कहा, "मैं पार्टी नेता का पद स्वीकार करने के लिए इसलिए तैयार हुआ क्योंकि राजनीति मेरे ख़ून में है. लेकिन मेरा अनुभव सीमित है, मैं सीखना चाहता हूँ."

बिलावल ने उन पत्रकारों की आलोचना भी की जिन्होंने उनके निजी जीवन के बारे में जानने के लिए फ़ेसबुक जैसी वेबसाइटों को भी खंगाल डाला.

बिलावल ने आरोप लगाया कि कट्टरवाद को बढ़ावा पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की 'तानाशाही' दे रही है. अमरीका के बारे में उनकी राय थी कि अगर अमरीका तानाशाहों को समर्थन देना छोड़ दे तो कट्टरवाद से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है.

बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच में ब्रितानी पुलिस के सहयोग का उन्होंने स्वागत किया पर साथ ही संयुक्त राष्ट्र से जाँच करवाने की माँग फिर उठाई.

उन्होंने कहा, "हमें नहीं लगता कि पाकिस्तानी सरकार के तहत होने वाली जाँच में पारदर्शिता होगी. पहले ही फ़ोरेंसिक सबूत नष्ट किए जा चुके हैं."

अपनी माँ की हत्या के बारे में बिलावल का कहना था, आप भुट्टो परिवार के कितने लोगों को मार सकते हैं. कितने और परिवारों से भुट्टो आगे आ जाएँगे.

बिलवाल ने पत्रकारों के सामने एक छोटा सा बयान पढ़ा और फिर कुछ चुनिंदा सवालों के जवाब दिए.

जब बीबीसी के जेरेमी पैक्समैन ने बिलावल से सवाल पूछा कि वो कभी पाकिस्तान में रहे ही नहीं, फिर 19 साल की उम्र में देश का नेतृत्व करने की आकांक्षा कैसे उनमें आ सकती है, तो बिलवाल ने बड़ा संतुलित जवाब दिया- "मेरी ऐसी कोई आकांक्षा नहीं थी, संकट की घड़ी में मुझसे आगे आने के लिए कहा गया."

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