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'सुरक्षा नहीं, परेशानी बढ़ाएगा पहचान पत्र' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली में पहचान का कोई काग़ज़ साथ लेकर चलने के फ़ैसले से कोई सुरक्षा नहीं बढ़ेगी. अगर कोई चरमपंथी दिल्ली आता है और उसको ये पता है कि यहाँ पर पहचान पत्र देखे जाते हैं तो वो कोई फ़र्ज़ी पहचान पत्र बनवाकर आ सकता है. ऐसा करना उसके लिए बहुत कठिन नहीं होगा. इस तरह के क़दम से आप चरमपंथ को नहीं रोक पाएँगे. इसका असर यह होगा कि दिल्ली में आम लोगों से पुलिस वाले पैसे ऐंठने लगेंगे. दूर-दराज के इलाकों से काम के लिए दिल्ली आने वाले ग़रीबों के पास कोई काग़ज़ नहीं होता है, कोई पहचान पत्र नहीं होता है, राशन कार्ड भी नहीं होता है. हिंदुस्तान में आज आधी आबादी ऐसी है जिसके पास कोई पहचान पत्र नहीं है. उन लोगों को पुलिस जब-तब परेशान करेगी और उन्हें धमकी देकर पैसे ऐठ लेगी. पहचान पत्र का विचार उन लोगों के दिमाग़ की उपज है जो हवामहल में रहते हैं. जिनका आम लोगों से कोई रिश्ता-नाता नहीं है. उनको कोई समझ नहीं है कि आम लोगों की क्या मुश्किलें हैं. मानसिकता का सवाल ये लोग इस बात पर भी गहराई से नहीं सोचते कि इससे सुरक्षा कैसे बढ़ेगी. ये बात ऐसे ही लोगों ने या फिर दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों ने चलाई होगी क्योंकि इससे उनको ख़ूब फ़ायदा होगा. एक गणतांत्रिक देश में किसी राज्य से जारी हुआ कोई भी काग़ज़ात सभी राज्य में मान्य होना चाहिए. अगर कोई राज्य दूसरे राज्य के पहचान पत्र को स्वीकार नहीं करता है तो यह बिल्कुल ग़लत है. कई राज्यों ने क़ानून बना दिया है कि उनके यहाँ बाहर के लोग आकर ज़मीन नहीं ख़रीद सकते हैं, मेरी समझ में वो भी ग़लत है. अब अग़र उपराज्यपाल ने ऐसा आदेश जारी किया है तो इससे लोगों की परेशानी और बढ़ेगी. इस आदेश को क़ानूनी तौर पर चुनौती दी जा सकती है. पर चिंता की बात यह है कि जब हमारे सत्ता प्रतिष्ठान में बैठे लोगों की मानसिकता ही ऐसी होती जा रही है कि आम लोगों की परेशानी को बिल्कुल नज़रअंदाज़ करके सिर्फ़ संभ्रांत और संपन्न लोगों के लिए सोचा जाए तो फिर ऐसा ही होगा. (बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद से बातचीत पर आधारित) | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली में पहचान-पत्र रखना ज़रूरी05 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'पहचान पत्र अनिवार्य करना अच्छा क़दम'05 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस गायों के लिए भी पहचानपत्र..31 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस कहीं आप भी चेन जी या झांग मिन तो नहीं...18 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ब्रिटेन में पहचान-पत्र योजना संसद में29 जून, 2005 | पहला पन्ना 'अवैध लोग निकाले जाएँगे'08 जनवरी, 2003 | पहला पन्ना फ़ोटो पहचानपत्र अनिवार्य होंगे12 फ़रवरी, 2002 | पहला पन्ना आदमी को बनाया नंबर05 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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