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रियायतों की समीक्षा हो : मोदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली विशेष रियायतों की समीक्षा की मांग की है. बुधवार को राजधानी दिल्ली में योजना की स्वीकृति के लिए आयोजित राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के तहत अल्पसंख्यकों के लिए 15 फ़ीसदी बजट के प्रावधान की समीक्षा होनी चाहिए. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा था कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति और जनजातियों की समस्याओं को दूर करने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए. विरोध मोदी ने कहा, “नया 15 सूत्रीय कार्यक्रम विभिन्न योजनाओं के लाभान्वितों के लिए उनके अल्पसंख्यक दर्जे के हिसाब से बनाया गया है. देश के सामाजिक ढाँचे को बनाए रखने के लिए इसकी समीक्षा ज़रूरी है.” उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यकों पर पैसे की बारिश और लाभान्वितों के बीच भेदभाव से भारत को विकास के पथ पर ले जाने में मदद नहीं मिलेगी.” मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी राज्यों पर छोड़ दी जानी चाहिए. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ समाज के सभी ग़रीबों को मिलना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का पूरा ध्यान अपने ‘वोट बैंक’ पर है. उधर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने भी केंद्र की इस 15 सूत्रीय योजना का विरोध किया है. उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि रियायतों का लाभ समाज के सभी तबकों को मिलना चाहिए. सभी को न्याय मिले, लेकिन तुष्टीकरण के आधार पर इस तरह के प्रावधान का हम विरोध करेंगे.” मनमोहन की उम्मीद इस बीच, मनमोहन सिंह का कहना है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में आर्थिक वृद्धि दर को क़ायम रखने पर ज़ोर दिया गया है और इसके 10 फ़ीसदी रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि योजना में ऐसे प्रावधान है जिससे हम न केवल विकास की मौजूदा रफ़्तार को निकट भविष्ट में बरक़रार रख सकेंगे, बल्कि अगले पाँच वर्षों में इसे 10 फ़ीसदी तक ले जाने में भी सफल रहेंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक हलचलों से बेपरवाह नहीं रह सकता और खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए देश को दालों और खाद्य तेलों के भंडार में वृद्धि की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि दुनिया में कर्ज़ संकट और खाद्यान्नों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी जैसी घटनाओं का असर भारत पर भी होना लाज़मी है. उन्होंने कहा, “हमें खाद्यान्न भंडार में वृद्धि करने की ज़रूरत है. इसके अलावा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सस्ते अनाज की आपूर्ति सिर्फ़ ज़रूरतमंद और ग़रीबों को ही हो.” अमरीका में कर्ज़ संकट के भारत पर पड़े असर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “इस कर्ज़ संकट के बाद विश्वभर के शेयर बाज़ारों पर बादल छाए... लेकिन हम इन हलचलों से अछूते नहीं रह सकते हैं.” उल्लेखनीय है कि अमरीका में क़र्ज़ संकट और ब्याज दरों में कटौती की आशंकाओं के मद्देनज़र एशियाई और भारतीय बाज़ारों पर भयानक असर हुआ था. सोमवार को 30 शेयरों वाला बम्बई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक 770 अंक लुढ़क गया था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी में भी इसके इतिहास की सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'उद्योग जगत ज़िम्मेदारियाँ समझे'24 मई, 2007 | कारोबार अमरीका, एशिया के शेयर बाज़ार गिरे08 नवंबर, 2007 | कारोबार डॉलर के मुक़ाबले रुपया और मज़बूत10 अक्तूबर, 2007 | कारोबार 'बुनियादी सुविधाओं का तेज़ विकास ज़रूरी'09 अक्तूबर, 2007 | कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था में आई और तेज़ी31 अगस्त, 2007 | कारोबार बुलंदी की राह पर भारतीय अर्थव्यवस्था07 जून, 2007 | कारोबार रंगराजन को महँगाई घटने की उम्मीद07 जून, 2007 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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