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'डम्पर घोटाले' पर वेबसाइट बम्पर 'हिट' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट डम्पर डॉट इन नाम की एक वेबसाइट बम्पर 'हिट' है. ये वेबसाइट मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार के कथित 'डम्पर घोटाले' पर बनाई गई है. इस वेबसाइट के बारे में कुछ दिन पहले ही पता चला और उसके बाद फ़ोन से फ़ोन और एक मुंह से दूसरे मुंह होते हुए ये वेबसाइट पूरे शहर में मशहूर हो गई है. ऐसा कहा जा रहा है कि वेबसाइट लॉन्च करने वालों ने शुरू में ख़ुद ही फ़ोन कर के लोगों से पूछा कि "क्या आपने देखा है डम्पर डाट इन". उसके बाद से ही ये वेबसाइट हिट है और इसके चलते कथित डम्पर घोटाला फिर से राज्य में राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बिंदु बना हुआ है. भोपाल निवासी नागेन्द्र का कहना है कि सच जो भी हो, इतना तय है कि ये वेबसाइट शिवराज सिंह चौहान की ‘प्रसिद्धी’ के लिए वही कर रही है जिसकी कोशिश उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रपति चुनावों के समय प्रतिभा पाटिल विरोधी एक वेबसाइट लॉन्च करके की थी. ‘डम्पर घोटाला’ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी पत्नी साधना सिंह, उद्योगपति सन्नी गौड़ और कुछ अन्य लोगो के ख़िलाफ़ अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद से ही राज्य की राजनीति डम्पर के इर्द गिर्द घूम रही है. हाल ही में हुए विधान सभा सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों के विधायक डम्पर पर सवार होकर सदन पहुँचे थे. उसके बाद विपक्षी राजनीतिक दल के सदस्यों ने डम्पर की तस्वीर वाली और 'डम्पर सिंह चौहान' लिखी जैकेट और टोपी पहनी और मुख्य मंत्री के त्यागपत्र की मांग की. डम्पर मामले पर राज्य के चार बड़े कांग्रेसी नेताओं, अर्जुन सिंह, कमल नाथ, सुरेश पचौरी और ज्योतिर्रादित्या सिंधिया की चुप्पी के बावजूद ये कथित घोटाला ख़ासा चर्चित हो रहा है. ख़ासतौर पर विपक्ष का 'डम्पर सिंह चौहान' का नारा चर्चा में है जिसे एक अख़बार ने अपनी हेडलाइन बनाया. डम्पर डाट इन वेबसाइट पर 'डम्पर सिंह चौहान' वाले हिन्दी अख़बार में छपे इस हेडलाइन को सबसे ऊपर रखा है हालांकि कथित घोटाले पर बनी ये नई वेबसाइट अंग्रेज़ी में है. ये वेबसाइट किसकी ओर से शुरू की गई इस बारें में परस्पर विरोधी बातें सामने आ रही हैं. कुछ लोगो का कहना है कि ये वेबसाइट कांग्रेस ने लॉन्च की है जबकि दूसरे लोग मानते हैं कि ये मुख्यमंत्री की अपनी पार्टी में ही उनके विरोधी गुट का काम है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'वास्तुदोष के कारण विधायकों की मौतें'23 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मध्यप्रदेश में गो हत्या पर प्रतिबंध 12 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस मध्यप्रदेश में कांग्रेस घाटे में23 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस महाराष्ट्र के बाद मध्यप्रदेश में भी बाढ़01 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस गणतंत्र दिवस की मिठाई से 92 बीमार26 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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