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रविवार, 02 दिसंबर, 2007 को 23:19 GMT तक के समाचार
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बेनज़ीर-शरीफ़ के बीच होगी अहम बैठक
बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़
दोनों नेताओं के बीच पिछले साल लंदन में राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश हुई थी
पाकिस्तान के दो पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ सोमवार को अहम बैठक करेंगे.

दोनों नेता जनवरी में होने जा रहे आम चुनाव के बहिष्कार के मुद्दे पर चर्चा करेंगे.

नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि यदि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ इमरजेंसी के बाद हटाए गए सुप्रीम कोर्ट के जजों को बहाल नहीं करते हैं तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे.

हालांकि इस मुलाक़ात से पहले बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि विपक्ष की ओर से चुनाव का बहिष्कार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को मदद पहुँचाएगा.

बेनज़ीर का कहना है कि चुनाव का बहिष्कार होने से राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के लिए इमरजेंसी को जायज़ ठहराना आसान हो जाएगा.

मुलाक़ात

कई बरसों तक निर्वासित रहने के बाद दोनों पूर्व प्रधानमंत्री हाल ही में पाकिस्तान लौटे हैं और यह उसके बाद पाकिस्तान में उनकी पहली मुलाक़ात होगी.

हालांकि दोनों नेता टेलीफ़ोन पर एक दूसरे के संपर्क में रहे हैं.

इससे पहले दोनों नेताओं की लंदन में मुलाक़ातें हुई थीं लेकिन फिर बेनज़ीर भुट्टो ने परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ कथित राजनीतिक समझौते के बाद वह बातचीत बीच में छोड़कर पाकिस्तान आ गईं.

मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता राजा ज़फ़र-उल-हक़ ने कहा है कि नवाज़ शरीफ़ की पहल पर यह मुलाक़ात हो रही है.

उनका कहना था कि इस मुलाक़ात में नवाज़ शरीफ़ अपनी ओर से बेनज़ीर भुट्टो को चुनाव बहिष्कार के मसले पर मनाने की कोशिश करेंगे.

हालांकि बेनज़ीर भुट्टो ने बयान दिया है कि चुनाव बहिष्कार से परवेज़ मुशर्रफ़ को ही फ़ायदा होगा लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि चुनाव बहिष्कार का विकल्प खुला हुआ है.

चुनाव की वैधता

परवेज़ मुशर्रफ़
परवेज़ मुशर्रफ़ पर अब स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने का दबाव है

परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ कथित राजनीतिक समझौते को ध्यान में रखते हुए एक मुस्लिम लीग नवाज़ के उपाध्यक्ष तहमीना दौलताना ने कहा है कि यदि बेनज़ीर परवेज़ मुशर्रफ़ के पास पीछे के दरवाज़े से चली जाती हैं तो यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं होगा.

इस बीच इमरजेंसी लगाए जाने के बाद हज़ारों वकील, जज और विपक्ष के कार्यकर्ता अभी भी गिरफ़्तार हैं जबकि सरकार का दावा है कि उसने 3000 कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया है.

पिछले हफ़्ते ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते परवेज़ मुशर्रफ़ ने सेना की वर्दी उतार कर असैनिक राष्ट्रपति पद की शपथ ली है.

इसी दबाव के चलते उन्होंने 16 दिसंबर को इमरजेंसी हटाए जाने का फ़ैसला किया है.

परवेज़ मुशर्रफ़ के पश्चिमी देशों के मित्र, ख़ासकर अमरीका चाहते हैं कि चुनाव स्वतंत्र और साफ़ सुथरे चुनाव हों.

यदि विपक्ष इन चुनावों का बहिष्कार करता है तो इसकी वैधता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह तो लग ही जाएगा.

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