|
'मुशर्रफ़ एक दिसंबर तक वर्दी छोड़ेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के एटॉर्नी जनरल मलिक क़य्यूम ने कहा है कि उन्हें ऐसी संभावना नज़र आती है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ एक दिसंबर से पहले सेनाध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे देंगे. ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पहले ही कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट जब उनके अगले कार्यकाल को वैध ठहरा देगा तो उसके बाद वह सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे. एटॉर्नी जनरल मलिक क़य्यूम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट अगले कुछ दिनों में इस मामले पर अपना फ़ैसला सुना देगा. इस बीच राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ अपने सहयोगी राजनेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि एक कार्यवाहक सरकार बनाई जा सके जो जनवरी में प्रस्तावित आम चुनावों तक कामकाज संभाल सके. राष्ट्रीय एसेंबली का पाँच साल का कार्यकाल 15 नवंबर को समाप्त हो गया है. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का कार्यकाल इमरजेंसी के तहत बढ़ा दिया गया है. उधर पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि आम चुनावों से पहले देश में एक राष्ट्रीय सहमति वाली सरकार बननी चाहिए जो परवेज़ मुशर्रफ़ सरकार की जगह ले. लाहौर में नज़रबंद बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि इस मुद्दे पर वह विपक्षी नेताओं से बातचीत कर रही हैं ताकि उन्हें एक मंच पर इकट्ठा किया जा सके. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने भी कहा है कि एक गठबंधन बनाने के लिए वह भी नेताओं से बातचीत कर रहे हैं. परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में तीन नवंबर को आपातकाल लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के अनेक जजों को बर्ख़ास्त कर दिया है और अनेक को नज़रबंद कर दिया है जिनमें मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार मोहम्मद चौधरी भी हैं.
उनकी जगह अन्य जजों की नियुक्ति की गई है. आपातकाल लागू करने के फ़ैसले की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को सुनवाई शुरू हुई है. बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के वकीलों का तर्क होगा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इमरजेंसी लगाना ज़रूरी था. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ दो अहम चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. एक चुनौती है इमरजेंसी की वैधता और दूसरी है उनका दोबारा राष्ट्रपति चुना जाना. संवाददाताओं का कहना है कि वे दोनों ही मामलों में न्यायिक जीत हासिल कर सकते हैं. यदि सुप्रीम कोर्ट उनके राष्ट्रपति पद पर बने रहने को उचित ठहराता है तो राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ये कह चुके हैं कि वे सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे. मीडिया उधर अंतरराष्ट्रीय टेलीविज़न चैनल बीबीसी और सीएनएन और पाकिस्तान में दिखने शुरू हो गए हैं. इनके साथ ही दो पाकिस्तानी चैनल भी अब नज़र आने लगे हैं. पाकिस्तान सरकार ने इमरजेंसी लागू होने के साथ ही ग़ैरसरकारी समाचार माध्यमों के प्रसारण पर रोक लगा दी थी जिनमें अनेक टेलीविज़न चैनल भी थे. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा था कि कुछ समाचार माध्यमों ने देश में ऐसी राजनीतिक अनिश्चितता की स्थिति बनाने में योगदान किया जिसकी वजह से आपातकाल लगाना पड़ा. अमरीकी उप विदेश मंत्री जॉन नेग्रोपोंटे शुक्रवार को पाकिस्तान की यात्रा करने वाले हैं और कुछ समाचार माध्यमों से यह रोक इस यात्रा से एक दिन पहले हटाई गई है. अमरीका मीडिया और विपक्षी कार्यकर्ताओं पर पाकिस्तान सरकार के बल प्रयोग की कड़े शब्दों में आलोचना कर चुका है. |
इससे जुड़ी ख़बरें संसदीय चुनाव नौ जनवरी तक:मुशर्रफ़11 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'चुनाव की घोषणा सकारात्मक क़दम'11 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'सत्ता में भागीदारी पर कोई बातचीत नहीं'12 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस इमरान ख़ान 'आतंकवादी'14 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'जहाँ मार्शल लॉ हो, वहाँ कैसे चुनाव?'14 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||