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इमरजेंसी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाए जाने के मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. अदालत देश में आपातकाल लागू करने की वैधता पर सुनवाई कर रही है. महत्वपूर्ण है कि आपातकाल लागू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे इफ्तिख़ार चौधरी और कई अन्य जजों को, इमरजेंसी लागू होने के बाद बर्ख़ास्त किया जा चुका है. उनकी जगह अन्य जज ले चुके हैं. बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के वकीलों का तर्क होगा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इमरजेंसी लगाना ज़रूरी था. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ दो अहम चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. एक चुनौती है इमरजेंसी की वैधता और दूसरी है उनका दोबारा राष्ट्रपति चुना जाना. उनके विरोधियों का कहना है कि वे दोनो ही मामलों में न्यायिक जीत हासिल कर सकते हैं. यदि सुप्रीम कोर्ट उनके राष्ट्रपति पद पर बने रहने को उचित ठहराता है तो राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ये कह चुके हैं कि वे सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे. वे जनवरी में आम चुनाव कराने की घोषणा भी कर चुके हैं. 'मैं तानाशाह नहीं' इससे पहले विदेशी मीडिया को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा था कि वे तानाशाह नहीं हैं और देश को वापस लोकतांत्रिक पटरी पर लाना चाहते हैं. उन्होंने ये भी कहा है कि चुनाव में भाग लेने के लिए राजनीतिक नेताओं को रिहा किया जाएगा. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि यदि राजनीतिक नेता क़ानून का उल्लंघन करते हैं तो प्रशासन उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगा. विपक्षी नेता इमरान ख़ान को बुधवार को गिरफ़्तार किया गया था जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो नज़रबंद हैं. भुट्टो ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से इस्तीफ़ा देने को कहा था जबकि निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ हाल में कहा है कि जब तक इमरजेंसी लागू है तब तक चुनावों के बारे में सोचना बेमानी है. |
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