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शनिवार, 03 नवंबर, 2007 को 16:15 GMT तक के समाचार
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'पाकिस्तान पर बयानबाज़ी से बचे भारत'
परवेज़ मुशर्रफ़
पाकिस्तान के बिगड़ते हालातों के लिए पार्थसारथी ने मुशर्रफ़ को ज़िम्मेदार माना है
पाकिस्तान में उच्चायुक्त रहे जी पार्थसारथी ने कहा है कि वहाँ इमरजेंसी लागू होने के बाद भारत को बयानबाज़ी से बचते हुए स्थिति पर नज़र रखने की ज़रूरत है.

जी पार्थसारथी ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा, "इस स्थिति में अगर भारत कुछ कहेगा तो पाकिस्तान में लोग सोचने लगेंगे कि हम इसका फ़ायदा उठा रहे हैं.”

पार्थसारथी का मानना है कि भारत को पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाए जाने के मामले पर कोई बयान नहीं देना चाहिए क्योंकि यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है.

उनका कहना है कि भारत को केवल वहां के लोगों की ख़ुशहाली की कामना करना चाहिए.

इस स्थिति में अगर भारत कुछ कहेगा तो पाकिस्तान में लोग सोचने लगेंगे कि हम इसका फ़ायदा उठा रहे हैं
जी पार्थसारथी, पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त

पार्थसारथी ने आगे कहा, "इस स्थिति में जब पाकिस्तान की सेना चुनौतियों का सामना कर रही है पाकिस्तान के नागरिक अपनी ही सेना पर हमला कर रहे हैं."

उन्होंने पाकिस्तान में बिगड़े हालात के लिए राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को ज़िम्मेदार ठहराया.

पार्थसारथी का कहना था, “राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कट्टरपंथी गुटों को भारत और अफ़गानिस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने की कोशिश की लेकिन यह नीति उल्टी पड़ गई. कट्टरपंथी गुट अब मुशर्रफ़ के ही ख़िलाफ़ हो गए हैं.”

'बिगड़े हालात'

 राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कट्टरपंथी गुटों को भारत और अफ़गानिस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने की कोशिश की लेकिन यह नीति उल्टी पड़ गई. कट्टरपंथी गुट अब मुशर्रफ़ के ही ख़िलाफ़ हो गए हैं
जी पार्थसारथी, पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में पिछले चार महीने से स्थिति काफ़ी ख़राब थी. वहां के सुरक्षा हालात बहुत बिगड़े हुए थे और राजनीतिक स्थिति में भी अनिश्चितता का माहौल था."

यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तान की सेना भी मुशर्रफ़ के साथ है, पार्थसारथी ने कहा, “राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने अभी कुछ दिन पहले ही जनरल कियानी को पाकिस्तान की सेना का अगला सेनाध्यक्ष नियुक्त किया है. इमरजेंसी की घोषणा से पहले सेना के कोर कमांडरों की कोई औपचारिक बैठक भी नहीं बुलाई गई. इससे लगता है कि मुशर्रफ़ के साथ सेना का समर्थन भी अधिक समय तक नहीं रह सकता है."

उन्होंने आगे कहा, "सेना अपनी ही जनता के ख़िलाफ़ कब तक कार्रवाई कर सकती है. अगर आप वायुसेना को अपने ही जनता के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करेंगे तो कभी न कभी जनता आवाज़ तो उठाएगी ही.”

इमरजेंसी की घोषणा के समय मुशर्रफ़ के दिल में किस बात का डर था. इस सवाल पर पार्थसारथी ने कहा, “मुशर्रफ़ को सबसे अधिक डर सुप्रीम कोर्ट से था. उन्होंने सोचा होगा कि सुप्रीम कोर्ट उनके राष्ट्रपति चुने जाने को अवैध ठहरा सकती है."

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