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मंगलवार, 09 अक्तूबर, 2007 को 16:38 GMT तक के समाचार
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'बहनजी' ने अपने भाई को आगे किया

मायावती के भाई
आनंद कुमार मायावती के छोटे भाई हैं
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम की पुण्यतिथि पर रैली के बहाने से अपने छोटे भाई आनंद कुमार को पहली बार राजनीतिक मंच पर खड़ा कर दिया.

ऐसी चर्चाएँ गर्म हो गई हैं कि कहीं मायावती अपने भाई आनंद कुमार को धीरे से राजनीतिक उत्तराधिकारी तो नहीं बनाना चाहतीं.

अपने गुरू कांशीराम की तरह मायावती कहती रही हैं कि उनके परिवार के लोगों का उनकी राजनीति से कोई मतलब नहीं है.

इस रैली के ज़रिए मायावती ने अपने समर्थकों को बताया कि उनके भाई आनंद कुमार ने बहुजन मिशन का काम आगे बढ़ाने में बड़ी कुर्बानी दी है और इसीलिए उन्होंने उनको उस धनराशि का एक हिस्सा दिया है जो पार्टी समर्थकों ने उन्हें चंदे के रूप में दिया था.

 पार्टी के काम के बोझ से मेरी भी सेहत ख़राब हो गई. मैं बड़ी कमजोर हो गई थी. डॉक्टरों ने कहा की हीमोग्लोबिन का स्तर घटकर छह पर आ गया है. ऐसे में मेरे भाई ने मुझे अपना खून देकर कहा कि मैं मिशन का काम आगे बढाऊँ
मायावती, मंच से

रैली के मंच से अपने छोटे भाई का परिचय कराते हुए मायावती ने कहा, " 2003 में जब कांशीराम गंभीर रूप से बीमार हो गए उसी समय मुझे देश भर में पार्टी का जनाधार भी बढ़ाना था. तभी बीजेपी की केंद्र सरकार ने सीबीआई के ज़रिए मेरे ऊपर मुकदमे करवा दिए थे. ऐसे मुश्किल समय में मेरे बड़े भाई की औरत डरकर चली गई पर छोटे भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी ने मेरे घर पर रहकर मान्यवर कांशीराम की सेवा की."

मायावती ने कहा, "पार्टी के काम के बोझ से मेरी भी सेहत ख़राब हो गई. मैं बड़ी कमजोर हो गई थी. डॉक्टरों ने कहा की हीमोग्लोबिन का स्तर घटकर छह पर आ गया है. ऐसे में मेरे भाई ने मुझे अपना खून देकर कहा कि मैं मिशन का काम आगे बढाऊँ."

इस काम के लिए आनंद कुमार ने नौएडा की अपनी नौकरी भी छोड दी.

मायावती ने कहा की इसी सेवा के बदले मैंने वह धन उसको दिया जो आप सब लोगों ने मुझे उपहार में दिया था.

कुछ समय पहले मायावती ने इन्हीं आनंद कुमार को इससे पहले पार्टी के करोड़ों रूपयों की लागत से बना बहुजन प्रेरणा स्थल सौंप दिया था.

इसे अब बहुजन प्रेरणा ट्रस्ट के नाम से जाना जाता है और आनंद कुमार इसके मुख्य कर्ताधर्ता हैं.

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