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हैज़ा निगल रहा है भूखे लोगों को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा में हैज़े और डायरिया जैसी बीमारियों के कारण मरने वालों की संख्या आधिकारिक तौर पर 175 बताई जा रही है लेकिन ग़ैर सरकारी सूत्रों के अनुसार ये संख्या 250 से ज़्यादा हो सकती है. कालाहांडी के दूर दराज़ के इलाक़े में आकर समझ में आ रहा है कि भुखमरी और महामारी का सीधा रिश्ता है और इन बेहद ग़रीब लोगों की सुध लेने वाला शायद कोई नहीं है. जो ख़बरें आ रही थीं और जो हक़ीकत यहाँ मैंने देखी है उनमें ज़मीन-आसमान का अंतर है. ख़बरें ये आ रही थीं कि हैज़े और डायरिया ने महामारी का रूप ले लिया है. कहा जा रहा था कि चूंकि यहाँ पीने का पानी साफ़ नहीं है इसीलिए ये बीमारियाँ फैल रही हैं. ये बात तो एक हद तक सही है क्योंकि यहाँ के आदिवासी झरनों और नालों का पानी पीने को मजबूर हैं. दुर्गम इलाक़ा कालाहाँडी का ज़िला मुख्यालय है भवानीपटना. भवानीपटना से सौ किलोमीटर दूर ये इलाक़ा है जहाँ ये महामारी फैली हुई है. ये एक दुर्गम इलाक़ा है, पहाड़ियों से घिरा हुआ है, झरनों और पहाड़ी नदियों को पैदल पार कर ही इन इलाक़ों में पहुँचा जा सकता है. उड़ीसा के खाद्य मंत्री विष्णुभूषण हरिचंदन हेलिकॉप्टर और कार से यहाँ के दौरे पर आए थे लेकिन इलाक़ा इतना दुर्गम है कि वो एक ही गाँव तक पहुँच पाए. लेकिन जिन इलाक़ों में हालात सबसे ज़्यादा ख़राब हैं, कई मरीज़ हैं, पानी ख़राब है और दवाएँ न के बराबर हैं वहाँ मंत्री पहुँच नहीं पाए. गोपीनाथपुर पंचायत, अडरी जैसी कई जगहें हैं जहाँ सड़क की हालत ख़राब है, मंत्री के आने के लिए सड़क को ताबड़तोड़ ठीक किया गया. लेकिन फिर भी मंत्री उन जगहों तक नहीं पहुँच पाए जहाँ हमने ऐसे लोगों को देखा है जो पत्ते खाकर जी रहे हैं. अधिकारी निलंबित पिछले नौ महीनों से इन लोगों को चावल नहीं मिला है. अंत्योदय योजना के तहत ग़रीबी की रेखा के नीचे गुज़ारा कर रहे लोगों को चावल मिलने चाहिए. लेकिन इस योजना के तहत जिन लोगों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत है उन तक ही ये चावल नहीं पहुँच रहा है.
लोग पत्ते खाकर, या बाँस की छाल को उबालकर खा रहे हैं. कुछ लोग यहाँ मिले वो आम की गुठलियाँ खाकर गुज़ारा कर रहे हैं. यहाँ के लोग कह रहे हैं कि जिन लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं है वो जो मिल सकता है खा रहे हैं और इनके मुताबिक महामारी और भुखमरी का कहीं न कहीं गहरा रिश्ता है. प्रशासन तक ये ख़बरें पहुँचीं तो चार सप्लाई अफ़सरों को निलंबित कर दिया गया. ये अधिकारी उस व्यवस्था का हिस्सा थे जिसकी ज़िम्मेदारी इस दुर्गम इलाक़े तक लोगों तक भोजन पहुँचाने की ज़िम्मेदारी थी. एक सप्लायर जिसके ज़रिए अनाज पहुँचाया जाता था, उसके ख़िलाफ़ प्रथम सूचना रिपोर्ट यानि एफ़ आय आर दर्ज की गई है लेकिन वो फ़रार हो गया है. मुझे लोगों ने वो पत्ते मुझे दिखाए, थाली में परोसकर दिए लेकिन आपके और मेरे जैसे लोग शायद कल्पना भी नहीं कर सकते कि ऐसा खाना हो भी सकता है, खाना तो बहुत दूर की बात है. | इससे जुड़ी ख़बरें उड़ीसा में हैज़े से 80 की मौत27 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में गंभीर कुपोषण की चेतावनी20 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस भुखमरी से मौत की संख्या में बढ़ोत्तरी09 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना लाखों बच्चे भूखे सोते हैं: यूनिसेफ़02 मई, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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