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'मदर टेरेसा आज भी हमारे साथ हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोलकाता में जगदीश चंद्र बोस स्ट्रीट पर बनी इस इमारत में बीते दस वर्षों में कुछ भी नहीं बदला है. इसके मुख्यद्वार पर जाते ही कोई भी आगंतुक चौंक सकता है. दरवाजे पर लगे नामपट्ट पर अंग्रेजी में लिखा है-मदर टेरेसा, एमसी इन यानी मदर टेरेसा अंदर हैं. मदर हाउस नामक यह इमारत मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी का मुख्यालय है. मदर ने इसी इमारत में ठीक दस साल पहले अंतिम साँस ली थी. उनके निधन के छह महीने पहले मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी संभालने वाली सुपीरियर जनरल सिस्टर निर्मला और यहाँ रहने वाली ननें भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि मदर के जाने के बाद एक दशक में कोलकाता चाहे बहुत बदल गया हो, इस इमारत में रहने वालों की सेवा भावना ज़रा भी नहीं बदली है. सिस्टर निर्मला कहती हैं कि "मदर शारीरिक रूप से भले हमारे बीच नहीं हों, वे हमेशा हमारे साथ हैं. इसलिए उनकी मौत के एक दशक बाद भी न तो नाम पट्ट बदला है और न ही मदर हाउस का माहौल." अपना कार्यभार संभालते समय सिस्टर निर्मला को आशंका थी कि वे शायद उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाएंगीं. उन्होंने कहा था कि "मैं मदर टेरेसा नहीं हूँ". लेकिन उन्होंने मदर की सेवा भावना को उन्हीं की तरह आगे बढ़ाया है. वे कहती हैं कि ‘मदर ही हमारी प्रेरणास्त्रोत हैं.’ अंतरराष्ट्रीय संस्था जापान से आकर बीते 24 वर्षों से मदर हाउस में रहने वाली सिस्टर क्रिस्टी को भी बीते दस वर्षों में कोई बदलाव नजर नहीं आता है. मदर की समाधि के पास बैठकर बीते दिनों को याद करते हुए वे कहती हैं कि "हमने कभी मदर की कमी महसूस नहीं की. वे सदा हमारे बीच हैं. सिस्टर निर्मला ने भी उसी परंपरा को मजबूती से आगे बढ़ाया है."
क्रिस्टी बताती हैं कि "इन दस वर्षों में दुनिया भर में मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी के 166 नए केंद्र खुले हैं. सिस्टर निर्मला काफी सक्रिय हैं और उनको तो खुद मदर का आशीर्वाद हासिल है." अब भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या नेता महानगर में आने पर एक बार मदर हाउस जाते हैं. बीते दिनों इटली के प्रधानमंत्री रोमानो प्रोदी भी सपत्नीक यहाँ आए थे. इन दस वर्षों में बदली है तो सिर्फ एक चीज़. अपने आख़िरी दिनों में मदर टेरेसा जहाँ इसी इमारत में रह कर लोगों से मिलती-जुलती थीं, वहीं सिस्टर निर्मला मिशनरीज के काम के सिलसिले में देश-विदेश घूमती रहती हैं. उनकी इतनी सक्रियता मदर हाउस के दूसरे लोगों के लिए कभी-कभी चिंता का विषय बन जाता है. सिस्टर प्लेसिडा कहती हैं कि "सिस्टर निर्मला ने तो खुद को मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी के प्रसार के प्रति समर्पित कर दिया है." बीते दस वर्षों के दौरान विदेशों से काफी स्वयंसेविकाएं मदर हाउस में आईं हैं. फिलहाल प्रशिक्षुओं को मिला कर उनकी तादाद 170 तक पहुँच गई हैं. क्या मदर के बाद मिशनरीज को मिलने वाली दान की रकम घटी है? इस सवाल पर सिस्टर निर्मला कहती हैं कि "हम धन जुटाने में भरोसा नहीं रखते. लेकिन ईश्वर की कृपा से दान की रकम मिलने का सिलसिला पहले जैसा ही है. इसमें कोई कमी नहीं आई है." 14 वर्षों से यहाँ रहने वाली सिस्टर पेड्रो कहती हैं कि "दस वर्षों में यह जगह बिल्कुल नहीं बदली है और कभी बदलेगी भी नहीं." मदर हाउस में मदर टेरेसा का कमरा भी जस का तस है. उनके इस्तेमाल की वस्तुओं को लेकर समाधि के पास ही एक कमरे को संग्रहालय का रूप दे दिया गया है. पाँच सितंबर को मदर की पुण्यतिथि के मौके पर सुबह पाँच बजे से ही विशेष प्रार्थना सभाएँ आयोजित की जाएंगी. अभी 26 अगस्त को ही मदर का जन्मदिन मनाया गया था और दरअसल, उसी समय से विशेष प्रार्थनाओं का सिलसिला चल रहा है. इस मौके पर देश-विदेश से मदर के काफी भक्त भी मदर हाउस में पहुँचे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें मदर टेरेसा के श्रद्धालु रोम पहुँचे15 अक्तूबर, 2003 को | भारत और पड़ोस रोम में मदर टेरेसा पर बना संगीत नाटक16 अक्तूबर, 2003 को | मनोरंजन एक्सप्रेस मदर टेरेसा को 'धन्य' घोषित किया पोप ने19 अक्तूबर, 2003 | पहला पन्ना 'मदर टेरेसा' के लिए संदेश का संगीत23 अक्तूबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस पोप ने माना 'चमत्कार' हुआ20 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना 'चमत्कार' को तार्किक चुनौती04 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना मदर टेरेसा संतत्त्व के क़रीब01 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना मदर टेरेसा 'सर्वश्रेष्ठ भारतीय'12 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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