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रविवार, 23 अक्तूबर, 2005 को 11:35 GMT तक के समाचार
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'मदर टेरेसा' के लिए संदेश का संगीत

संदेश शांडिल्य
संदेश कभी ख़ुशी कभी ग़म और चमेली जैसी सफ़ल फ़िल्मों का संगीत दे चुके हैं
बालीवुड की संगीत सारणी मे रोज़ उतार चढ़ाव आते रहते हैं मगर कुछ उपलब्घियाँ ऐसी होती हैं जो कलाकार को उतार चढ़ाव से कहीं ऊँचा मुक़ाम दे देती हैं.

अंतरराष्ट्रीय संगीत के आसमान पर संगीतकार संदेश शांडिल्य एक ऐसे ही मुक़ाम पर पहुँचने जा रहे हैं.

उन्होने हाल ही में 'ट्राइब' नाम की फ़्रेंच फ़िल्म कंपनी के लिये मदर टेरेसा पर बनने वाली फ़िल्म 'बीटिफ़िकेशन ऑफ़ मदर टेरेसा' का संगीत रचा है.

ग़ौरतलब है कि इस डाक्यू-ड्रामा में हॉलीवुड की मशहूर स्टार पेनेलोप क्रूज़ भी एक भूमिका कर रही हैं.

संदेश का कहना है के इस फिल्म का संगीत इसके कथानक की आत्मा है जो उन्होने बड़ी लगन से तैयार किया है.

 जन-संगीत माने जाने वाले फ़िल्मी संगीत को किसी पश्चिमी क्लासिकल मास्टर द्वारा इतना गौरव दिया जाना भारतीय फ़िल्म संगीत का सम्मान है
संदेश शांडिल्य

'राजश्री प्रोड्क्शन' की नई फ़िल्म 'उफ़ क्या जादू मोहब्बत है' के लिये संगीत देते हुए संदेश को मशहूर पियानो वादक रिचर्ड क्रलेडरमैन के साथ काम करने का मौक़ा मिला तो क्रलेडरमैन इतने प्रभावित हुए के उन्होंने अपने ताज़ा एलबम में 'उफ़ क्या जादू मोहब्बत है' के टाइटल गीत को प्रतिनिधि स्थान दिया है.

रिचर्ड क्रलेडरमैन न सिर्फ़ पश्चिमी क्लासिकल संगीत के जाने माने मास्टर हैं बल्कि 'चेरियट्स ऑफ फ़ायर' नाम की चर्चित फ़िल्म में पियानो की अपनी धुन से वो हॉलीवुड के संगीत जगत में अपना स्थान बना चुके हैं.

संदेश मानते हैं, "जन-संगीत माने जाने वाले फ़िल्मी संगीत को किसी पश्चिमी क्लासिकल मास्टर द्वारा इतना गौरव दिया जाना भारतीय फ़िल्म संगीत का सम्मान है."

'कभी ख़ुशी कभी ग़म', 'चमेली' और 'सोचा न था' जैसी फिल्मों का संगीत रचने वाले संदेश इसके अलावा निर्देशक जानू बरुआ और के रविशंकर की आने वाली फिल्में कर रहे हैं.

मदर टेरेसा

मदर टेरेसो के जीवन और दर्शन को समझने के लिये संदेश कलकत्ता स्थित उनके विभिन्न संस्थानो में गए और वहाँ से एक अनूठा अनुभव लेकर लौटे.

 मदर टेरेसा के आश्रम में हजारों अनाथ बच्चों और दुनिया से ठुकराए गए लोगों को इतना प्यार और अपनापन मिलता है जो इंसानियत की बेजोड़ मिसाल है
संदेश

तो मदर टेरेसा फ़िल्म के लिए संगीत तैयार करने और इसकी तैयारी का अनुभव कैसा रहा? इस प्रश्न के उत्तर में संदेश कहते हैं, "मदर टेरेसा के आश्रम में जाने के बाद मेरे संगीत में आए बदलाव की परख तो दर्शक-श्रोता करेंगे मगर मेरे जीवन में एक बड़ा बदलाव ज़रूर आया है."

आश्रम के अनुभव के बारे में उन्होंने कहा, "मदर टेरेसा के आश्रम में हजारों अनाथ बच्चों और दुनिया से ठुकराए गए लोगों को इतना प्यार और अपनापन मिलता है जो इंसानियत की बेजोड़ मिसाल है."

संदेश कहते हैं, "जब कोई वहाँ जाता है तो यही प्यार और अपनापन वो बच्चे आप पर बरसा देते हैं, इस बीहड़ संसार में अचानक इतना प्यार मिल जाए तो आदमी प्रतिक्रियाशून्य हो जाता है, मेरी तो आँखें छलक पड़ीं."

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