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बुधवार, 15 अक्तूबर, 2003 को 13:00 GMT तक के समाचार
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मदर टेरेसा के श्रद्धालु रोम पहुँचे
पोप जॉन पॉल और मदर टेरेसा
पोप जब भारत गए थे तब उनकी मुलाक़ात मदर टेरेसा से हुई थी

मदर टेरेसा को संत की उपाधि देने के अंतिम चरण में इतनी बड़ी संख्या में ननें रोम पहुँच गई हैं कि उन्हें ठहराने के लिए उन तंबुओं का सहारा लिया जा रहा है जिसे आम तौर पर भूकंप पीड़ितों के लिए रखा जाता है.

पोप जॉन पॉल रविवार को एक समारोह कर रहे हैं और उसमें शरीक होने के लिए हज़ारों ननें वहाँ पहुँच चुकी हैं.

इनमें लगभग साढ़े चार सौ तो मदर टेरेसा के संगठन 'मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटीज़' से ही जुड़ी हैं.

रोम के बाहरी इलाकों में चमकीले पीले रंग के आपातकालीन तंबू खड़े किए गए हैं और उनसे गाँव-सा बसा दिया गया है.

इसी तरह चैपल (उपासना गृह) में भी जगह नहीं रहती है इसलिए उनके लिए वहीं पर अस्थाई चैपल बना दिया गया है.

वहाँ पहुँचने वालों में सिस्टर निर्मला भी हैं जिन्होंने मदर टेरेसा के बाद मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटीज़ के प्रमुख की ज़िम्मेदारी सँभाली है.

पोप की सक्रियता

मदर टेरेसा का निधन छह साल पहले हुआ था और पोप ने उन्हें काफ़ी जल्दी संत की उपाधि देने की दिशा में काम किया है.

रविवार को होने वाला कार्यक्रम मदर टेरेसा के संत बनने की दिशा में अंतिम औपचारिक कदम होगा.

सिस्टर निर्मला
कार्यक्रम में हिस्सा लेने कई ननों के साथ पहुँची हैं सिस्टर निर्मला

वैसे नन ही सिर्फ़ ऐसी कैथोलिक नहीं हैं जो रोम पहुँच रही हों.

रविवार को सेंट पीटर्स स्क्वायर पर होने वाले इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने हज़ारों लोगों के पहुँचने की उम्मीद है.

वह कार्यक्रम पोप को काफ़ी थकाने वाला भी साबित हो सकता है.

स्मृति चिह्न बेचने वालों ने भी इस मौके पर कई स्मृति चिह्न दुकानों में सज़ा रखे हैं मगर दुकानदारों का कहना है कि मदर टेरेसा का काम ग़रीबों के बीच था और इसका मतलब ये हुआ कि वे काफ़ी पैसे ख़र्च नहीं कर पाएँगी.

मदर टेरेसा के प्रशंसक अगर वे स्मृति चिह्न नहीं भी ख़रीद पाते हैं तो वे एक संगीत कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं.

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