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रविवार, 02 सितंबर, 2007 को 22:55 GMT तक के समाचार
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पुलिस के चंगुल में आया शातिर लुटेरा

ट्रेन
पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है
यह ख़बर उन लोगों के लिए ख़ासकर चौंकाने वाली है जो रेलगाड़ी में प्रथम श्रेणी के वातानुकूलित डिब्बे में यह सोच कर सफ़र करते हैं कि इससे उनके जानमाल की सुरक्षा रहेगी.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक ऐसे पढ़े लिखे शातिर युवक को गिरफ़्तार किया है, जिसने जल्दी पैसा कमाने के लिए सुनियोजित रूप से एसी प्रथम श्रेणी का टिकट लिया और बगल वाले यात्री की हत्या कर कई लाख रूपए लूट लिए. हत्या के बाद उसने लाश चलती ट्रेन से फेंक दी.

गिरफ़्तार युवक ब्रजेश कुमार वर्मा के शिकार बने कानपुर के चर्चित डॉक्टर अनुराग मित्तल. पुलिस ने ब्रजेश को लूट के माल के साथ गिरफ़्तार कर लिया.

अनुराग मित्तल 27 अगस्त को श्रमशक्ति एक्सप्रेस से कानपुर से दिल्ली आ रहे थे, मगर उनका शव हाथरस स्टेशन के पास बरामद हुआ.

 रेलवे को एसी बोगी में आरक्षण करा कर चलने वालों की पहचान सुनिश्चित करने की सलाह दी जाएगी
इंस्पेक्टर गुरुदर्शन सिंह

इस हत्याकांड के बाद आम लोगों का गुस्सा फूटा तो प्रशासन सक्रिय हुई. स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ), रेलवे सुरक्षा बल (जीआरपी) और सिविल पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद इस हत्याकांड की पड़तें खोल दीं.

दरअसल डॉक्टर मित्तल से लूटे गए आठ हज़ार अमरीकी डॉलर ब्रजेश की गिरफ़्तारी का कारण बन गया. वह इन्हें भारतीय रुपयों में भुनाने में लगे थे लेकिन पुलिस को भनक लग गई.

शौक

ब्रजेश ने पुलिस हिरासत में ही पत्रकारों को बताया कि उन्होंने डॉक्टर से लूटे गए पैसों से एक बाइक और एक लैपटॉप ख़रीदी है.

वह फ़र्जी पते और नाम से टिकटें बनवाता था.

उनका कहना है कि वह बीएससी का छात्र है. देहरादून में भी पढ़ाई के दौरान वह

ब्रजेश एक बैंक में एजेंट की नौकरी करता था जहाँ उसे ये पता चला कि अमूमन एसी फर्स्ट क्लास में लोग काफी पैसा लेकर यात्रा करते हैं.

राजकीय रेलवे पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल गुरुदर्शन सिंह इसे एक चौंकाने वाली घटना मानते हैं. वो कहते हैं, “रेलवे को एसी बोगी में आरक्षण करा कर चलने वालों की पहचान सुनिश्चित करने की सलाह दी जाएगी”

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