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मोटरसाइकिल से पंपसेट और जेनरेटर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक मोटरसाइकिल मिल जाए तो क्या बिजली-पानी की समस्या दूर हो सकती है? अगर आप यह सवाल छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार औऱ उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में पूछेंगे तो इसका जवाब होगा- हाँ. इन इलाकों में मोटरसाइकिल के इंजन का इस्तेमाल बिजली-पानी के लिए ही हो रहा है. असल में सारा मामला चोरी की मोटरसाइकिलों से जुड़ा हुआ है. पिछले कुछ वर्षों में मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. इसके पीछे एक बड़ा कारण इनके इंजन से बनने वाला जेनरेटर सेट और मोटर पंप है. छत्तीसगढ़ और उसके सीमावर्ती राज्यों में बड़े पैमाने पर ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो चोरी की मोटरसाइकिलों के इंजन से मोटरपंप और जेनरेटर सेट बना रहा है. छत्तीसगढ़ में मोटरसाइकिल चोरों ने आम जनता के साथ-साथ पुलिस की भी नींद उड़ा रखी है. हाथ की सफ़ाई वाहन चोरी के अधिकांश मामलों में पुलिस को कोई सफलता नहीं मिल रही है. इसके पीछे एक बड़ा कारण चुराए गए वाहन को टुकड़ों-टुकड़ों में बेचना माना जा रहा है. आमतौर पर चुराए गए किसी भी वाहन को उसके कागज़ात, नंबर प्लेट और इंजन पर दर्ज़ नंबर से पहचाना जाता है. नक़ली काग़ज़ात और नंबर प्लेट बना पाना तो मुश्किल नहीं है, लेकिन चोर गिरोह के लिए इंजन पर उकेरे गए नंबर को मिटा पाना आसान नहीं होता. ऐसी स्थिति में कोई जोख़िम उठाने के बजाय चोर गिरोह के लोग कुछ कम क़ीमत में ही सही, वाहन का एक-एक कलपुर्ज़ा अलग-अलग कर बेच देते हैं. मोटरसाइकिल के इंजन से जेनरेटर सेट और मोटर पंप बनाने में माहिर छत्तीसगढ़ और बिहार में सक्रिय एक मैकेनिक की मानें तो इन दिनों चोरी के मोटरसाइकल के इंजन की मांग बढ़ी हुई है. बाबा भइया नाम के एक मैकेनिक ने हमें बताया, "राज्यों में बिजली-पानी का ख़ासा अभाव है. आम जनता के बस में नहीं है कि वो जेनरेटर सेट ख़रीद सके. ऐसे में मोटरसाइकिल के इंजन से बना जेनरेटर सेट और खेतों के लिए छोटा मोटर पंप बेहद सस्ता विकल्प है." मोटरसाइकिल के इंजन में केवल दो से तीन हज़ार रुपए खर्च कर के उसे आसानी से मोटरपंप या जेनरेटर सेट के लायक बनाया जा सकता है. चिंता हीरो होंडा के क्षेत्रीय प्रबंधक सतीश प्रभु मोटरसाइकिल चोरी की लगातार बढ़ती घटनाओं से बेहद चिंतित हैं. उनका मानना है कि बाज़ार में पुरानी मोटरसाइकिलों की भी अच्छी क़ीमत मिल जाती है, इसलिए वाहन चोर गिरोह इसकी ओर ज़्यादा ध्यान देता है.
सतीश प्रभु कहते हैं, "चोरी की मोटरसाइकिल के इंजन से जेनरेटर सेट और मोटर पंप बनाए जाने की घटनाएं बिहार और उत्तर प्रदेश में ज़रुर लोकप्रिय हुई हैं लेकिन हमारी नज़र इस ग़ैरक़ानूनी कारोबार पर है." हालांकि जिनके ज़िम्मे ऐसे ग़ैरक़ानूनी धंधों को रोकना है, वे इससे अनभिज्ञता दर्शाते हैं. पुलिस अधीक्षक बीएस मरावी ने इस बारे में सुना ज़रुर है लेकिन अब तक इस तरह का कोई मामला उनके सामने नहीं आया है. सरगुजा इलाक़े के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "यह बीमारी बिहार से यहां आई है और छूत की तरह फैल रही है. हमारी कोशिश है कि इस पर क़ाबू पाया जा सके." इस 'बीमारी' पर कब काबू पाया जा सकेगा, यह कोई नहीं जानता. तब तक मोटरसाइकिल मालिकों को एक चेतावनी तो दी ही जा सकती है- "अपनी मोटरसाइकिल चोरों से बचा कर रखें." | इससे जुड़ी ख़बरें ज़िंदगी की प्रयोगशाला के माहिर16 जनवरी, 2004 | विज्ञान डीज़ल चोरी मामले में सैनिकों पर कार्रवाई30 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस चलती का नाम गाड़ी !15 नवंबर, 2002 | विज्ञान देश का पहला गैसीफ़ायर पावर प्लांट 27 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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