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'गतिरोध दूर करने के लिए समिति बनेगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत अमरीका परमाणु समझौते को लेकर यूपीए सरकार और वामदलों के बीच बने गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों पक्षों के बीच वार्ताएं जारी हैं. वामपंथी नेताओं ने उम्मीद जताई है कि यूपीए सरकार वामपंथियों की आपत्तियों को दूर करने के लिए जल्द ही एक समिति बनाएगी और तब तक केंद्र सरकार अमरीका के साथ परमाणु समझौते को लागू करने की दिशा में कोई क़दम नहीं उठाएगी. जहाँ एक ओर केंद्र सरकार के भविष्य पर अटकलें जारी हैं वहीं यूपीए सरकार अमरीका के साथ परमाणु समझौते के लिए वामपंथियों को मनाने के लिए वार्ताएं कर रही है. रविवार को कांग्रेस के संकटमोचक और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी और कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के साथ मुलाक़ात की. वार्ताओं के ताज़ा दौर को देखा जाए तो कोई स्पष्ट नतीजा सामने नहीं दिखता. आपत्तियाँ दूर करने की कोशिश यूपीए के नेताओं के साथ बातचीत के बाद सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने संकेत दिया कि आने वाले चार पांच दिनों में सरकार एक ऐसी समिति बनाएगी जो परमाणु समझौते को लेकर वामपंथियों के संदेहों को दूर करने और अमरीका के हाइड एक्ट जिस पर यह समझौता आधारित है, उसके परिणामों का आकलन करने का काम करेगी.
इसमें राजनेताओं के साथ तकनीकी विशेषज्ञ और कूटनयिक भी शामिल होंगे. उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह आने वाले चार पाँच दिनों में भी बन सकती है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन ने कहा कि वामपंथी दलों की आपत्तियों को दूर करने के लिए जो व्यवस्था बनेगी, उसमें वो हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं. उनका कहना था कि लेकिन इस दौरान सरकार 123 समझौते को लागू करने की दिशा में कोई क़दम न उठाए. लेकिन अभी तक सरकार ने परमाणु समझौते के बारे में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ बात न करने या समझौते को लागू करने की दिशा में कोई क़दम न उठाने का आश्वासन नहीं दे रही है. और वामदल बिना किसी ठोस आश्वासन के अपने रवैये में नरमी लाने को तैयार नहीं दिखते. बहरहाल यूपीए सरकार फॉ़रवर्ड ब्लाक और आरएसपी जैसे अन्य वामदलों से भी इस मामले पर बात करेंगी और समझा जा रहा है कि किसी सैद्धांतिक सहमति के बाद यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी वामदलों के साथ मुलाक़ात करेंगी. इस मुद्दे पर मतभेदों की गहराई को देखते हुए ये वार्ताएं समाधान कितना करेंगी या दोनों पक्षों को कुछ और समय पाने की महज़ कोशिश के तहत होंगी, यह अटकलों का विषय है. |
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