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'टला नहीं है यूपीए सरकार का संकट' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत अमरीका परमाणु समझौते पर यूपीए सरकार और वामपंथी दलों के बीच चल रही तक़रार सभी अख़बारों के पहले पन्ने पर छाई हुई है. हिंदुस्तान का शीर्षक है- योद्धा मैदान में, तलवारें म्यान में. अख़बार लिखता है कि यूपीए सरकार के अस्तित्व पर मंडरा रहा राजनीतिक संकट टला नहीं है. राष्ट्रीय सहारा का शीर्षक है- सरकार का गणित, लेफ्ट बिन भी राइट. समाचार पत्र का कहना है कि परमाणु मुद्दे पर यूपीए के घटक दलों का मानना है कि वामपंथी दल सरकार से समर्थन वापस न लें. बावजूद इसके यदि वे समर्थन वापस ले लेते हैं तो भी मनमोहन सरकार को ख़तरा नहीं है. दैनिक जागरण की सुर्खी है- सरकार अब पीछे हटनेवाली नहीं हैं. अख़बार लिखता है कि सरकार बचाने के लिए कांग्रेस ने विशेषज्ञ समिति बनाने का फॉर्मूला सुझाया है. नवभारत टाइम्स का कहना है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर उठे विवाद में वामपंथियों को मनाने के लिए यूपीए सरकार बीच का रास्ता तलाश रही है. जनसत्ता का शीर्षक है- हाइड क़ानून का आकलन हो. अख़बार के अनुसार सीपीएम ने कहा कि समाधान का यह कोई फार्मूला नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार यूपीए और वामदलों के बीच एक तरह का दिमागी खेल शुरू हो चुका है कि अगले चुनाव कब कराए जाएं. अख़बार की नज़र में सरकार पर ख़तरा अभी टला नहीं है, पर चुनाव के समय को लेकर वामदल भी दुविधा में हैं. अख़बार कहता है की यूपीए के बड़े घटक दल डीएमके और आरजेडी ने भी सरकार से किसी तरह से इस संकट को टालने की सलाह दी है. इस अख़बार की माने तो सरकार जाने में अभी कुछ समय लगेगा. हिंदुस्तान टाइम्स ने अपना पहला पन्ना लगभग पूरा ही इस मुद्दे को दिया है. अख़बार की राय मे इस मुद्दे पर गतिरोध तोड़ने के जो प्रयास हो रहे हैं, वो इस गतिरोध को तोड़ने की बजाए सरकार को कुछ और समय देने के प्रयास ज्यादा हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया का कहना है कि आग बुझाने की कोशिशें जारी हैं. अख़बार लिखता है कि सरकार ने इस मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की पेशकश की है. समाचारपत्र का कहना है कि वामपंथी अब भी अड़े हुए हैं, पर वो सरकार को कुछ समय दे सकते हैं. |
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