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मौत के 40 साल बाद अंतिम संस्कार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विमान दुर्घटना में मौत के 40 साल बाद हिमालय की पहाड़ियों में भारतीय सैनिक का पार्थिव शरीर सुरक्षित अवस्था में मिला और अब पूरे सैनिक सम्मान के साथ असम के पैतृक गाँव में उनका अंतिम संस्कार किया गया. 40 साल पहले 100 सैनिकों को लेकर जा रहा सेना का विमान पहाड़ियों के ऊपर 20 हज़ार फीट की ऊंचाई पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. उसमें 22 साल के महेंद्र नाथ फूकन भी थे. दुर्घटना के बाद लाख कोशिशों के बावजूद फूकन और दो अन्य के पार्थिव शरीर नहीं खोजे जा सके थे. इस महीने के शुरू में सेना की एक टीम को हिमाचल प्रदेश में पहाड़ियों में क़रीब 6, 264 मीटर की ऊंचाई पर फूकन का पार्थिव शरीर सुरक्षित अवस्था में मिला. महेंद्र नाथ फूकन के छोटे भाई दुर्गानाथ फूकन ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया, '' भगवान चाहते थे कि हम उनके शरीर के दर्शन करें, इसलिए इतने दिनों तक उनके पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखा.'' फूकन के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर दिल्ली से सोमवार को असम के डिब्रूगढ़ लाया गया. परिवार के लोगों ने बताया कि इसके बाद इसे गाँव लाया गया, जहाँ सैकड़ों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. पुलिस अधीक्षक श्यामल सैकिया ने बताया,'' सेना ने पूरे सैनिक सम्मान और बंदूकों की सलामी के साथ उनका अंतिम संस्कार किया.'' उन्होंने यह भी बताया कि जिस जगह पर फूकन का अंतिम संस्कार हुआ है वहाँ सेना एक स्मारक बनाने की योजना भी बना रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें हथियार डिपो से 15 लाशें निकलीं13 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस मोक्ष की तलाश में जर्मन साधु 21 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस कोई अफ़सोस नहीं बम गिरानेवालों को05 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना आठ दिन बाद चाय मांगी03 जनवरी, 2004 | पहला पन्ना 'चमत्कारी' दवा की खोज26 जून, 2003 | विज्ञान 'करिश्मा' पर अदालत की रोक | भारत और पड़ोस फिर भी वह बच गई22 अप्रैल, 2003 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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