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मुंबई दंगों की रिपोर्ट पर राजनीति तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में वर्ष 1992-93 के दौरान हुए दंगों पर जारी श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट को लेकर एक बार फिर राजनीतिक खेमे आमने-सामने आते नज़र आ रहे हैं. जहाँ एक ओर राज्य के मुख्यमंत्री बिलासराव देशमुख ने कहा है कि राज्य सरकार इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगी वहीं शिवसेना ने चेतावनी दी है कि राज्य सरकार को ऐसा करने से बचना चाहिए. शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अगर राज्य सरकार मुंबई दंगों पर आधारित इस रिपोर्ट को लागू करने का प्रयास करेगी तो शिवसैनिक सड़कों पर उतर आएंगे. उधर राज्य के मुख्यमंत्री इस रिपोर्ट के बारे में पहले ही कह चुके हैं कि पिछली सरकार के इस रिपोर्ट पर रवैये से हम अपना रुख़ तय नहीं करेंगे. इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार कार्रवाई करेगी. ग़ौरतलब है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुंबई में भड़के दंगों की जाँच करने के लिए जस्टिस बीएन कृष्ण के नेतृत्व में एक आयोग गठित किया गया था जिसने फरवरी 1998 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में दंगों को लेकर कई हिंदुत्ववादी कट्टरपंथी लोगों और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे. रिपोर्ट पर राजनीति जब बीबीसी ने शिवसेना अध्यक्ष की इस टिप्पणी पर शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक संजय राउत से पूछा कि उनकी इस टिप्पणी का क्या मतलब निकाला जाए तो उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल वोटों की राजनीति के लिए ऐसा कर रही है जो कि ग़लत है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1993 के बाद से महाराष्ट्र का माहौल शांत है औऱ किसी तरह की सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई है. ऐसे में इस रिपोर्ट को उठाने से माहौल बिगड़ सकता है. संजय राउत ने कहा, "पार्टी आलाकमान पहले ही कह चुका है कि यह मुसलमानों के वोट की राजनीति से प्रेरित है. अगर सरकार इसे लागू करना चाहती है तो ठीक है, हम भी तैयार हैं." उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मुस्लिम संगठन इस वक्त इस रिपोर्ट को लागू करने की माँग इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि अभी हाल-फिलहाल में मुंबई बम धमाकों के संबंध में अभियुक्तों को सज़ा दी गई है और इसमें मृत्युदंड पाने वाले कुछ लोग मुसलमान हैं. उन्होंने कहा कि शिवसेना नहीं चाहती है कि राज्य में सद्भाव की स्थिति बिगड़े और इसके लिए ज़रूरी है कि इस रिपोर्ट को लेकर राजनीति न की जाए. महज औपचारिकता दरअसल, श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट को लेकर ऐसी स्थिति तब बनी जब कांग्रेस आलाकमान ने राज्य के मुख्यमंत्री से पूछा कि इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की गई है.
इसपर मुख्यमंत्री बिलासराव देशमुख ने कहा है कि राज्य पुलिस को रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं और इसे तय करने के लिए एक विशेष सेल भी गठित कर दिया गया है जो कि दंगों से जुड़े मामलों की दोबारा जाँच करेगा. हालांकि मुंबई दंगों से संबंधित याचिका पर काम कर रहे वकील यूसुफ़ मुछाला ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि वो राज्य सरकार के इन निर्देशों को महज औपचारिकता और खानापूर्ति ही मानते हैं. उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट पर काम करने के लिए पहले से ही एक विशेष कार्य दल गठित था जिसके कामकाज से प्रभावित लोग असंतुष्ट थे. ऐसे में एक और सेल का गठन इस रिपोर्ट को टालने जैसा ही है. मुछाला मानते हैं कि इस रिपोर्ट को लागू करने के प्रति न तो वर्तमान सरकार गंभीर है और न ही पिछली सरकार गंभीर थी. माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान भी दोनों सदनों में इसे लेकर टकराव देखने को मिल सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें भागलपुर दंगे: 14 को उम्रकैद की सज़ा 07 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'धर्म के आधार पर भड़काना धोखा है'21 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 1984 के दंगों के लिए तीन को उम्र क़ैद29 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस न्याय से ही न्याय के लिए उठते सवाल20 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'कंकाल दंगों में मारे गए लोगों के ही'24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस बैनर्जी रिपोर्ट संसद में पेश करने पर रोक20 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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