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1984 के दंगों के लिए तीन को उम्र क़ैद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की राजधानी दिल्ली में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीन लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने इन तीन लोगों को उन दंगों के दौरान एक सिख परिवार के तीन सदस्यों की हत्या करने के आरोप में गुरूवार को यह सज़ा सुनाई है. इन तीन लोगों के नाम हैं - हरप्रसाद भारद्वाज, आरपी तिवारी और जगदीश गिरी. ग़ौरतलब है कि अक्तूबर 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. न्यायालय ने हालाँकि अभियोजन पक्ष की इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि यह मामला 'असाधारण श्रेणी' आता है इसलिए तीनों अभियुक्तों को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए. अतिरिक्त सैशन जज राजेंद्र कुमार शास्त्री ने अपने फ़ैसले में कहा, "न्याय की माँग सश्रम आजीवन कारावास से पूरी हो जाएगी."
न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों पर पाँच-पाँच हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. इन अभियुक्तों पर आरोप लगाया गया है कि एक और दो नवंबर 1984 को एक भीड़ की अगुवाई की और उन्होंने पूर्वी दिल्ली में हरमिंदर कौर के घर पर हमला किया. अभियोजन पक्ष के बयान के अनुसार हरमिंदर कौर के पति निरंजन सिंह दिल्ली पुलिस में एक हैड कांस्टेबल थे और वह एक नवंबर 1984 को शाहदरा रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी पर तैनात थे. बयान के अनुसार निरंजन सिंह को उस भीड़ ने हमला करके पहले तो मार दिया फिर आग में जला दिया और उस भीड़ की अगुवाई तीनों अभियुक्त हरप्रसाद भारद्वाज, आरपी तिवारी और जगदीश गिरी कर रहे थे. अभियोजन पक्ष की दलील के अनुसार हरमिंदर सिंह के 17 वर्षीय बेटे गुरपाल सिंह और दामाद महेंद्र सिंह को भी इन अभियुक्तों ने अगले दिन मार दिया था. |
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