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गुरुवार, 09 अगस्त, 2007 को 17:37 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तान में स्वतंत्र चुनाव हों:बुश
जॉर्ज बुश
जॉर्ज बुश को लगता है कि चुनाव से परवेज़ मुशर्रफ़ की वैधानिक मान्यता बढ़ेगी
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की इमरजेंसी न लगाने की घोषणा के बाद अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि पाकिस्तान में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए.

बुधवार को जब राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने जब अचानक ही अपनी अफ़ग़ानिस्तान यात्रा रद्द कर दी तो ये अटकलें लगाईं जा रही थीं कि पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाई जा सकती है.

लेकिन गुरुवार को सरकार की ओर से घोषणा की गई है कि देश में इमरजेंसी नहीं लगाई जा रही है.

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है और आतंरिक राजनीतिक परिस्थियाँ राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के अनुकूल नहीं हैं.

बुश की उम्मीद

अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने परवेज़ मुशर्रफ़ से यह भी कहा है कि वे ख़ुफ़िया एजेंसियों से प्रमुख चरमपंथी संदिग्धों के बारे में मिल रही जानकारी पर भी कार्रवाई करें.

उन्होंने कहा कि कट्टरपंथियों और अतिवादियों को लेकर अमरीका की चिंता को पाकिस्तान समझता है.

 वहाँ की अंदरूनी परिस्थियों के मद्देनज़र मेरा ज़ोर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर है, हम इस बारे में उनसे बात भी करते रहे हैं और हमें उम्मीद है कि वे ऐसा करेंगे
जॉर्ज बुश

संवाददाताओं का कहना है कि अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान में चुनाव हो जाएँ जिससे कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को वैधानिक मान्यता मज़बूत हो सके.

याद रहे कि परवेज़ मुशर्रफ़ 1999 में एक लोकतांत्रिक सरकार का तख़्तापलट करके सत्ता पर आए थे.

तब से वे राष्ट्रपति और सेना प्रमुख दोनों पदों पर आसीन हैं.

व्हाइट हाउस में एक पत्रकारवार्ता में बुश ने कहा, "वहाँ की अंदरूनी परिस्थियों के मद्देनज़र मेरा ज़ोर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर है, हम इस बारे में उनसे बात भी करते रहे हैं और हमें उम्मीद है कि वे ऐसा करेंगे."

उधर पाकिस्तान के प्रवक्ता ने इमरजेंसी न लगाने की घोषणा करते हुए कहा कि परवेज़ मुशर्रफ़ पर दबाव था कि वे इमरजेंसी लागू कर दें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं करने का फ़ैसला किया क्योंकि वे 'लोकतंत्र के प्रति वचनबद्ध हैं.'

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ की लोकप्रियता कम हुई है और प्रशासन को आशंका है कि उनके एक बार फिर पद संभालने को क़ानूनी चुनौती दी जा सकती है.

मुश्किल में मुशर्रफ़

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ इस समय चौतरफ़ा मुसीबतों में घिरे हैं.

परवेज़ मुशर्रफ़
जनरल मुशर्रफ़ अभी भी दोनों पदों पर काबिज रहना चाहते हैं

पिछले महीने इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में चरमपंथियों के साथ सेना के टकराव के बाद से देश में आत्मघाती हमलों की बाढ़ सी आ गई है.

अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे क़बायली इलाक़े में सरकार के साथ हुए संघर्ष विराम समझौते को तोड़कर कट्टरपंथी सेना और सुरक्षाबलों पर लगातार हमले कर रहे हैं.

अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान मुशर्रफ़ पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं कि वे अल क़ायदा और तालेबान के पाकिस्तानी चरमपंथियों को क़ाबू में करें.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निलंबित करने के मुशर्रफ़ के फ़ैसले को पलट दिया गया है और मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी पद पर बहाल हो गए हैं.

मुशर्रफ़ के ऊपर चौतरफ़ा राजनीतिक दबाव है कि वे सेनाध्यक्ष का पद छोड़ दें.

वैसे मुशर्रफ़ ने इस वर्ष निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया है.

विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की बेनज़ीर भुट्टो ने भी ज़ोर देकर कहा है कि उन्हें फ़ौजी वर्दी उतार देनी चाहिए.

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