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एक करोड़ पौधे लगाने का रिकॉर्ड | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के वन अधिकारियों ने 31 जुलाई को एक ही दिन में एक करोड़ से अधिक पौधे लगाने का विश्व रिकार्ड बनाने का दावा किया गया है. वन अधिकारियों के मुताबिक़ हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए चलाए गए इस वृक्षारोपण अभियान के तहत पूरे राज्य भर में सरकारी मशीनरी के सहयोग से किसानों, स्कूली छात्रों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के लगभग 3.23 लाख लोगों ने एक करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए. अधिकारियों के मुताबिक़ प्रदेश के 70 जिलों में 9320 स्थानों पर वृक्षारोपण किया गया और रोपित किए गए इन पौधों की सिंचाई और देखरेख की भी व्यवस्था की गई है. इसके लिए बैंकों तथा अन्य संस्थानों ने वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है. विश्व कीर्तिमान वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी रूपक डे ने बताया कि बड़े पैमाने पर हुए इस वृक्षारोपण की जानकारी गिनीज़ बुक ऑफ वर्ड रिकार्ड को दी गई है और इसे बतौर कीर्तिमान शामिल करने के ज़रूरी दस्तावेज़ अगले 15 दिनों में भेज दिए जाएँगे. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने भी इस व्यापक वृक्षारोपण को अपने एक खरब पेड़ लगाने के कार्यक्रम में शामिल कर लिया है. उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने भी राजधानी लखनऊ स्थित अपने आवास पर नीम का पेड़ लगाया. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में एक पौधा लगाया. मुख्य वन संरक्षक बीके पटनायक ने कहा कि इस वृक्षारोपण कार्यक्रम के लिए लोगों में गज़ब का उत्साह देखने को मिला. अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले में ही एक स्थान पर 40 हज़ार पौधे लगाए गए. लख़नऊ में वरिष्ठ अधिकारियों ने गोमती नदी के किनारे पिपराघाट में दो हज़ार पौधे लगाए. एक समय पर इस स्थान में घने पेड़ थे और नवाब यहां सैर के लिए आते थे. लेकिन आज यहां सिर्फ ऊँची इमारतें ही नज़र आती हैं. पर्यावरण राज्य के वन विभाग की प्रमुख सचिव विद्यानंद गर्ग ने कहा, "एक ही दिन के भीतर बड़े पैमाने पर पौधे लगाने का उद्देश्य राज्य के लोगों के बीच पर्यावरण असंतुलन और बढ़ते प्रदूषण के प्रति जागरूकता लाना है". ग़ौरतलब है कि भारतीय वन नीति के तहत पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए भूमि का एक तिहाई हिस्सा पेड़-पौधों से भरा होना चाहिए. जब कि अभी देश के सिर्फ 24 फ़ीसदी हिस्से पर हरित क्षेत्र है. विडंबना है कि उत्तर प्रदेश में पेड़-पौधों से ढका वन्य क्षेत्र सिर्फ़ नौ फ़ीसदी है. अधिकारियों ने कहा है कि लोगों को अपनी निजी़ ज़मीनों में पेड़ लगाने या काटने की छूट देने के लिए वन्य कानूनों में संशोधन किया जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'चिनार' को बचाने के लिए भूख हड़ताल31 मई, 2007 | भारत और पड़ोस देहरादून में वेलेंटाइन्स डे पर अनोखी पहल14 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस 230 साल की उम्र में ऑपरेशन30 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पेड़ लगाने वाली आम महिला की ख़ास कहानी14 जून, 2007 | भारत और पड़ोस ताकि बनी रहे हरियाली30 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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