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'ग़ैर-कश्मीरी मज़दूर राज्य छोड़ दें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर के एक प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा है कि ग़ैर कश्मीरी मज़दूरों को राज्य छोड़कर चले जाना चाहिए. उनका कहना है कि ये लोग भारतीय सेना के कहने पर कश्मीर में शराबख़ोरी और इसी तरह के दूसरे दुराचारों को बढ़ावा दे रहे हैं. पिछले हफ़्ते हंदवाड़ा में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी और ग़ैर-कश्मीरी मज़दूरों के ख़िलाफ़ गिलानी का बयान इसके बाद आया है. पुलिस का कहना है कि इसके बाद एक पश्चिम बंगाल के एक बढ़ई और राजस्थान के एक चर्मकार ने दो स्थानीय निवासियों के साथ इस अपराध में शामिल होना स्वीकार किया था. इस घटना के बाद हंदवाड़ा में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था. मंगलवार को हज़ारों प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए गिलानी ने कहा कि ग़ैर-कश्मीरी मज़दूरों और कामगारों को जम्मू-कश्मीर छोड़कर चले जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये लोग ऐसे समाज से आते हैं जहाँ शराबख़ोरी, अनैतिकता और दूसरे ग़लत काम बहुतायत से होते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सेना के लोग इन्हें शराब देते हैं जिससे कि वे कश्मीरी युवाओं को शराबख़ोरी और दूसरे दुराचारों में लगा सकें. उनका कहना था, "यह सब इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सेना चाहती है कि कश्मीरियों का आज़ादी के लिए लड़ने का जज़्बा ख़त्म कर दिया जाए." गिलानी ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे ग़ैर-कश्मीरी कामगारों को काम न दें और उनसे वापस जाने के लिए कहें. सस्ते मज़दूर उल्लेखनीय है कि भारत प्रशासित कश्मीर में बिहार, उत्तरप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से हज़ारों लोग हैं जो बढ़ई, राजमिस्त्री, नाई का काम करते हैं और बड़ी संख्या में लोग मज़दूरी करते हैं. चूँकि कश्मीर के स्थानीय निवासी सरकारी और दूसरी नौकरियों में रुचि लेने लगे हैं इसलिए इस तरह के कामों के लिए दूसरे राज्यों के लोगों की ज़रुरत पड़ने लगी है. यहाँ तक कि ये लोग सीमा के संवेदनशील इलाक़ों में भी काम कर रहे हैं. एक ओर तो कश्मीरियों को सस्ते मज़दूर भी चाहिए लेकिन दूसरी ओर उनके भीतर यह डर भी समा रहा है कि इससे कही घाटी की जनसंख्या की तस्वीर न बदल जाए. इसी तरह की आशंका जताते हुए रेज़ीडेंसी रोड के एक दूकानदार रफ़ी अहमद कहते हैं, "उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और एक दिन ऐसा आएगा जब उनकी संख्या हम कश्मीरियों से अधिक हो जाएगी." श्रीनगर के आईजी पुलिस एसएम सहाय का कहना है कि यदि गिलानी के बयान से कोई भड़कता है तो इसका दोष उनपर ही होगा. लेकिन गिलानी की इस अपील से बेख़बर ग़ैर-कश्मीरी मज़दूर अपने कामकाज में लगे हुए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'भारत विरोधी बयान' पर हंगामा26 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर का हल जनमत संग्रह से'13 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस हुर्रियत के गिलानी गुट में टूट22 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भरोसे में नहीं लिया गया: हुर्रियत03 जून, 2005 | भारत और पड़ोस कश्मीर के दायरे में रहें कश्मीरी नेता27 मई, 2005 | भारत और पड़ोस गिलानी ने राजनीतिक दल बनाया07 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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