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'कश्मीर का हल जनमत संग्रह से' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को बुधवार को सर्वदलीय हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े का दोबारा अध्यक्ष चुन लिया गया है. अध्यक्ष चुने जाने के बाद पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए ग़िलानी ने कहा कि वो इस रुख़ पर क़ायम हैं कि कश्मीर समस्या का समाधान जनमत संग्रह से ही संभव है. गिलानी ने दोबारा अध्यक्ष चुने जाने के बाद कहा कि जनमत संग्रह के ज़रिए ही जम्मू-कश्मीर का भविष्य तय हो सकता है. उन्होंने स्वायत्तता, स्वशासन या कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के संयुक्त नियंत्रण के विकल्पों को सिरे से ख़ारिज कर दिया. तीन साल का निर्धारित कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण वो अपने पद से इस्तीफ़ा देना चाहते हैं. बुधवार को श्रीनगर में हुई बैठक में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के सभी 14 गुटों के प्रतिनिधियों ने गिलानी के इस अनुरोध को ठुकरा दिया और उन्हें अन्य तीन साल के अध्यक्ष चुन लिया गया. गिलानी तीन वर्ष पूर्व सर्वदलीय हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी धड़े से अलग हो गए थे. गिलानी भारत प्रशासित कश्मीर के सबसे प्रभावशाली अलगाववादी नेताओं में गिने जाते हैं और कट्टरपंथी धड़ों पर उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है. | इससे जुड़ी ख़बरें जम्मू कश्मीर के लिए कई घोषणाएँ25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जम्मू कश्मीर के लिए पाँच सूत्री कार्यक्रम24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस हिंसा के बीच कश्मीर में गोलमेज़ सम्मेलन24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस गीलानी धड़े ने न्यौता ठुकराया20 मई, 2006 | भारत और पड़ोस हुर्रियत नेताओं की प्रधानमंत्री से बातचीत03 मई, 2006 | भारत और पड़ोस हुर्रियत के साथ दूसरे दौर की बातचीत02 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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