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'मुसलमानों में चरमपंथ का समर्थन घटा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक विश्वव्यापी सर्वेक्षण के मुताबिक धर्म की आड़ में आम लोगों के ख़िलाफ़ आत्मघाती बम हमलों को सही ठहराने वाले मुसलमानों की संख्या घट रही है. पिछले पाँच वर्षों के दौरान 'आत्मघाती हमलों' का समर्थन करने वाले मुसलमानों की संख्या में आई तीव्र गिरावट इस ओर संकेत करती है कि गरीब देशों में इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि अगली पीढ़ी का जीवन बेहतर होगा. अमरीका में प्रकाशित हुई सर्वेक्षण रिपोर्ट 'ग्लोबल ओपीनियन ट्रेंड्स' के लिए 47 देशों में 45 हज़ार लोगों का इंटरव्यू किया गया. सर्वेक्षण में पाया गया कि पाँच साल पहले के मुकाबले आम तौर पर लोगों में संतुष्टि का स्तर बढ़ा है. जैसे-जैसे परिवार और देश समृद्ध हो रहे हैं उसी अनुपात में लोग आशावान हो रहे हैं और मौजूदा सरकारों के पक्ष में समर्थन बढ़ रहा है. चीन में जिन लोगों पर सर्वेक्षण हुए उनमें से 86 फ़ीसदी का मानना था कि उनकी अगली पीढ़ी की ज़िंदगी उनसे बेहतर होगी. मुस्लिम बहुल देश मुस्लिम देशों के लोगों में इस्लाम के नाम पर आत्मघाती बम हमलों का समर्थन करने वालों की संख्या में तेज़ गिरावट आई है. लेबनान, जॉर्डन, बांग्लादेश, पाकिस्तान और इंडोनेशिया में यह गिरावट 50 फ़ीसदी या इससे अधिक भी दर्ज की गई. हालाँकि 70 फ़ीसदी फ़लस्तीनियों का कहना था कि कभी-कभी आम नागरिकों के ख़िलाफ़ आत्मघाती हमले करने में कुछ भी ग़लत नहीं है. लैटिन अमरीकी देशों में वामपंथी रूझान वाले नेताओं की सफलता के बावजूद अधिकतर लोगों का कहना था कि बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था में ही लोगों की ज़िंदगी बेहतर होती है. |
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