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'मुसलमानों के लिए ख़ास कार्यक्रम हों' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सच्चर समिति की सिफ़ारिशों के क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री मोहम्मद अशरफ़ अली फ़ातमी की अध्यक्षता में गठित 13 सदस्यीय समिति ने मंगलवार देर रात भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. बीबीसी ने यह गोपनीय रिपोर्ट देखी है. इसमें मुसलमानों के विकास के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की सिफ़ारिश की गई है. साथ ही कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे मुस्लिम इलाक़ों में विकास की मुहिम तेज़ की जाए नहीं तो राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो सकता है. इस बीच विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस रिपोर्ट को मुस्लिम तुष्टीकरण का हिस्सा करार दिया है. ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन करके सुझाव देने के लिए सच्चर समिति का गठन किया था. विशेष उपाय सूत्रों के अनुसार फ़ातमी समिति ने केंद्र सरकार से कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में सीटें बढ़ाई जाएँ और वो इलाक़े जहाँ मुसलमानों की संख्या 10 हज़ार से ज़्यादा है, वहाँ मुसलमान लड़कियों के लिए नवोदय विद्यालय की स्थापना की जाए. साथ ही अल्पसंख्यक मंत्रालय की सिफ़ारिश पर जनगणना विभाग ने योजना आयोग को एक रिपोर्ट भेजी है. इसके अनुसार देश के वो शहर जहाँ मुसलमानों की ख़ासी आबादी है, वहाँ के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएँ. इस सूचना के आधार पर आने वाले बजट और 11 वीं पंचवर्षीय योजना में मुसलमानों के लिए कार्यक्रम तैयार किए जाएँगे. आने वाले दिनों में यूपीए सरकार आम बजट में भी अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए राज्यों और सार्वजनिक बैंकों को दिशा निर्देश देगी. सुरक्षा को ख़तरा रिपोर्ट में कहा गया है कि मुसलमान सबसे अधिक संख्या में शहरों में रहते हैं. योजना आयोग को भेजी गई रिपोर्ट में सरकार को चेतावनी दी गई है कि अधिक मुस्लिम आबादी वाले अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे ज़िलों में विकास के लिए जल्दी क़दम नहीं उठाए गए तो देश की सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है. सरकार से कहा गया है कि महाराष्ट्र में मालेगाँव में पिछले साल हुए बम धमाकों ने वहाँ के मुसलमानों की दर्दनाक स्थिति को उजागर किया था और यह सरकार के लिए शर्मनाक उदाहरण है. प्रतिक्रिया इस समिति की रिपोर्ट पर राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया वैसी ही है, जैसी उम्मीद की जा रही थी. मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के नेता और पूर्व एनडीए सरकार में भाजपा के एकमात्र मुसलमान मंत्री शाहनवाज़ हुसैन ने भारत सरकार की नीति को मुसलमानों का तुष्टीकरण बताते हुए संकेत दिया कि इस मामले पर उनकी पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है. उन्होंने कहा, “यह सिर्फ़ एक चाल है और कुछ नहीं. यह सरकार लोगों को सिर्फ़ बेवकूफ बना रही है.” उधर यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मोहम्मद सलीम ने साफ किया कि वामपंथियों के दबाव के चलते यूपीए सरकार मुसलमानों के कल्याण को महज राजनीतिक मुद्दा नहीं बना पाएगी. लगभग दो हफ़्ते बाद ही संसद का बजट सत्र शुरू होगा और यह साफ है कि मुसलमानों के कल्याण पर यूपीए सरकार की नीति पर खूब राजनीति होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें उम्मीदों की कसौटी पर संविधान?27 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सच्चर रिपोर्ट संसद में पेश की गई30 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सच्चर रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई17 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी नौकरियों में 'पिछड़े' मुसलमान10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सेना में मुसलमानों की गिनती पर हंगामा17 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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