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छवि संवारने के लिए आग बुझाने की सलाह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्ट्रेलिया में मुसलमान धार्मिक नेताओं को फ़ायरमैन और लाइफ़ गार्ड के तौर पर काम करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव सामने आया है ताकि देश में रहने वाले मुसलमानों की छवि बेहतर हो सके. लेबनानी मुस्लिम एसोसिएशन के अध्यक्ष टॉम ज़ेरिका ने यह प्रस्ताव रखा है जिस पर उलेमा इस सप्ताहांत विचार-विमर्श करेंगे. टॉम ज़ेरिका का कहना है कि मुसलमान उसी तरह अलोकप्रिय हो गए हैं जैसे एक ज़माने में कम्युनिस्ट थे. उन्होंने खुलकर कहा कि जो इमाम ये समझते हैं कि वे ऑस्ट्रेलियाई क़ानूनों का पालन नहीं कर सकते उन्हें यह देश छोड़ देना चाहिए. लेबनानी मुस्लिम एसोसिएशन ऑस्ट्रेलिया का सबसे प्रभावशाली और बड़ा इस्लामी संगठन है इसलिए ज़ेरिका के इस बयान को काफ़ी अहमियत दी जा रही है. ज़ेरिका ने एक 16 पन्ने की रिपोर्ट तैयार की है जिसे मुसलमानों के प्रमुख धार्मिक नेताओं के सामने पेश किया गया है, इस रिपोर्ट की एक प्रति एक ऑस्ट्रेलियाई अख़बार को मिली है, रिपोर्ट में कहा गया है कि 'ऑस्ट्रेलियाई हमें काफ़ी झेल चुके हैं.' ज़ेरिका का कहना है, "हम कम्युनिस्टो की तरह हो गए हैं, ख़ास तौर पर पश्चिमी देशों में, कुछ लोग हमारे समुदाय से इतने परेशान हो गए हैं कि हमारा और हमारे बच्चों का जीवन कठिन होता जा रहा है."
अपने प्रस्ताव के बारे में उन्होंने कहा, "यह देखना बहुत सुखद होगा कि एक पगड़ी वाले इमाम साहब भी दूसरे स्वयंसेवकों के साथ आग बुझाने में जुटे हुए हैं." ऑस्ट्रेलिया में फ़ायर सर्विस के लिए स्वयंसेवक के तौर पर काम करने वाले लोगों को काफ़ी सम्मान की नज़र से देखा जाता है. ऑस्ट्रेलिया में मुसलमानों के शीर्ष धार्मिक नेता ताज अल दीन अल हिलाली ने यह कहकर हंगामा मच दिया था कि कम कपड़े पहनकर घूमने वाली महिलाएँ "दरअसल बलात्कार करने का न्योता देती हैं." इसके बाद अल हिलाली ने ऑस्ट्रेलिया को सज़ायाफ़्ता क़ैदियों का देश कहकर सनसनी फैला दी थी. ज़ेरिका अब ऑस्ट्रेलिया में मुसलमानों की छवि सुधारना चाहते हैं और लोगों की नज़रें इसी बात पर टिकी हैं कि उन्हें इस काम में कितना समर्थन मिलता है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमीना वदूद ने नमाज़ पढ़ाईपहला पन्ना महिलाओं ने फ़तवों को नकारा26 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस साथ नमाज़ पढ़ने के हक़ की लड़ाई27 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना 'नमाज़ का वक़्त हो गया'07 सितंबर, 2003 | विज्ञान सरकारी कर्मियों के लिए नमाज़ ज़रुरी22 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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